Sunday, August 16, 2026 10:25:36 AM

सुप्रीम कोर्ट का FIR पर बड़ा फैसला
NEET प्रदर्शन: FIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NEET प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज FIR राज्य सरकारें वापस ले सकती हैं। हालांकि, गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों में यह राहत लागू नहीं होगी।

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सुप्रीम कोर्ट का FIR पर बड़ा फैसला |

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि दिल्ली सहित अन्य राज्य सरकारें नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बंद या वापस ले सकती हैं। हालांकि, यह राहत केवल उन छात्रों तक सीमित रहेगी जिनके खिलाफ गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि "क्रिमिनल एंटीसिडेंट" का अर्थ केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों से है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सामान्य मामलों को इस श्रेणी में नहीं माना जाएगा।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार अपने पहले के रुख पर कायम है। उन्होंने कहा कि नीट प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन जिन लोगों का संबंध गंभीर और जघन्य अपराधों से है, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा।

तुषार मेहता ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि ऐसे 2,700 से अधिक लोगों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों के कारण दर्ज एफआईआर वापस नहीं लेने का निर्णय लिया गया है।

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के समक्ष दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान वकीलों के बच्चों के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने इस संबंध में लगभग 300 वीडियो अदालत को सौंपे और मांग की कि दिल्ली पुलिस आयुक्त तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के निदेशक से पूछा जाए कि प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और पैलेट गन जैसे उपायों का इस्तेमाल क्यों किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसे लोगों की पहचान हुई है जो पुलिस की वर्दी में नहीं थे, लेकिन कार्रवाई में शामिल दिखाई दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की है। इसी दिन मामले में आगे की सुनवाई होगी।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस कार्रवाई या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने दोहराया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

गौरतलब है कि 20 जुलाई को दिल्ली में सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में आयोजित मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले भी दागे थे।


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