Friday, August 14, 2026 08:57:40 AM

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल 20वां दिन
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन 20वें दिन, 20 जुलाई तक जिंदा रहने की जताई इच्छा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन 20वें दिन पहुंचा। उन्होंने 20 जुलाई तक जिंदा रहने की इच्छा जताई और समर्थकों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील की।

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन 20वें दिन 20 जुलाई तक जिंदा रहने की जताई इच्छा
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल 20वां दिन |

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जीवित रहना चाहते हैं।

वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद तक निकाले जाने वाले शांतिपूर्ण मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह लोकतंत्र के मंदिर में अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह शारीरिक रूप से भले ही कमजोर हो गए हों, लेकिन उनका मनोबल अभी भी मजबूत है। हल्के अंदाज में उन्होंने कहा कि अगर 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ, तो वह "भूत बनकर वापस आएंगे।"

सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लंबे अनशन के कारण उनका वजन करीब 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उनका उपवास अब गंभीर अवस्था में पहुंच गया है। चिकित्सकों के अनुसार, यदि स्थिति और बिगड़ती है तो उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

इस बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की।

नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है और वांगचुक भी इस आंदोलन का हिस्सा हैं। CJP का गठन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से किए जाने की टिप्पणी के बाद किया गया था।

इससे पहले सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर भी लंबे आंदोलन का हिस्सा रहे थे। वर्ष 2025 में लेह में हुए आंदोलन के दौरान 24 सितंबर को हुई हिंसा में चार लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए थे। इसके बाद सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया, जहां वह करीब 170 दिन तक रहे।

भारत में लंबे अनशन का इतिहास भी रहा है। महात्मा गांधी से लेकर पर्यावरणविद् जी.डी. अग्रवाल तक कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने अपनी मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल की। देश की सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड इरोम शर्मिला के नाम है, जिन्होंने मणिपुर से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने की मांग को लेकर वर्ष 2000 से 2016 तक लगभग 16 वर्षों तक अनशन किया था। इस दौरान उन्हें जीवित रखने के लिए नाक के माध्यम से तरल आहार दिया जाता था।


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