'सतलुज' फिल्म पर एसजीपीसी का विरोध |
अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में 10 जुलाई को रोष मार्च निकालने का फैसला किया है। यह मार्च श्री हरिमंदिर साहिब क्षेत्र से शुरू होकर उपायुक्त कार्यालय तक जाएगा, जहां एसजीपीसी का प्रतिनिधिमंडल प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग करेगा।
एसजीपीसी ने संगत से भी बड़ी संख्या में इस शांतिपूर्ण विरोध मार्च में शामिल होने की अपील की है।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि फिल्म में भाई जसवंत सिंह खालड़ा के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को दिखाया गया है। साथ ही उस समय सिख युवाओं पर हुए कथित पुलिस अत्याचारों को भी फिल्म का हिस्सा बनाया गया है। उनका कहना है कि फिल्म पर प्रतिबंध लगाकर सरकार ने सच्चाई को सामने आने से रोकने का प्रयास किया है, जो उचित नहीं है।
धामी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों की अभिव्यक्ति और ऐतिहासिक घटनाओं को सामने रखने का अधिकार होना चाहिए। यदि किसी विषय पर मतभेद हैं, तो उनका समाधान बातचीत से होना चाहिए, न कि प्रतिबंध लगाकर। इसी उद्देश्य से एसजीपीसी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएगी।
इसके अलावा एसजीपीसी ने गुरुद्वारा सुधार लहर और अकाली आंदोलन के प्रमुख नेता सरदार तेजा सिंह समुंदरी की 100वीं शहादत शताब्दी मनाने की भी घोषणा की है। यह कार्यक्रम 17 जुलाई को श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित एसजीपीसी मुख्य कार्यालय के तेजा सिंह समुंदरी हाल में आयोजित होगा।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने बताया कि 15 जुलाई को श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ होगा और 17 जुलाई को पाठ के भोग के बाद श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसमें सिख पंथ की प्रमुख हस्तियां सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन, संघर्ष और योगदान पर अपने विचार रखेंगी।
धामी ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने गुरुद्वारों के स्वतंत्र प्रबंधन, पंथक सिद्धांतों की रक्षा और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जीवन सत्य, न्याय, निस्वार्थ सेवा और कौमी चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।