Sunday, August 16, 2026 09:35:28 AM

भारत की परंपरा को समर्पित 'वीव्स ऑफ इंडिया' फेस्टिवल
सांसद एवं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने किया ‘वीव्स ऑफ इंडिया फेस्टिवल’ का अवलोकन

कंगना रनौत ने 'वीव्स ऑफ इंडिया फेस्टिवल' में 116 पारंपरिक हथकरघा बुनाइयों का अवलोकन किया और भारतीय बुनकरों व हस्तकरघा की सराहना की।

सांसद एवं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने किया ‘वीव्स ऑफ इंडिया फेस्टिवल’ का अवलोकन
भारत की परंपरा को समर्पित 'वीव्स ऑफ इंडिया' फेस्टिवल |

सांसद एवं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम (द कॉटेज) में आयोजित ‘वीव्स ऑफ इंडिया फेस्टिवल’ का दौरा किया। उन्होंने देशभर से प्रदर्शित की गई 116 पारंपरिक हथकरघा बुनाइयों का अवलोकन किया और विभिन्न राज्यों से आए बुनकरों से संवाद कर उनके हस्तनिर्मित उत्पादों एवं पारंपरिक बुनाई की कला की सराहना की।

कंगना रनौत ने बनारसी, चंदेरी, महेश्वरी, जामदानी, मूगा, भागलपुरी सिल्क सहित अनेक पारंपरिक बुनाइयों को करीब से देखा और भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत की प्रशंसा की।

कंगना रनौत ने कहा, "यहाँ आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। पहले जब लोग मुझसे मिलते थे तो कहते थे कि उन्हें मेरा अभिनय बहुत पसंद है, लेकिन अब ज़्यादातर लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं अपनी साड़ियाँ कहाँ से खरीदती हूँ। मैं सभी को यही बताती हूँ कि मैं अपनी साड़ियाँ सीधे बुनकरों से खरीदती हूँ। चाहे प्रधानमंत्री का 'मेक इन इंडिया', 'मेड इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का अभियान हो, मैं हमेशा भारतीय बुनकरों और उनके उत्कृष्ट कार्य का समर्थन करती हूँ।"

वस्त्र मंत्रालय, विकास आयुक्त (हथकरघा) एवं सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम (सीसीआईसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह प्रदर्शनी 7 अगस्त 2026 तक चलेगी। प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक आम जनता के लिए खुली है।

इस विशेष प्रदर्शनी में देशभर की 116 पारंपरिक हथकरघा बुनाइयों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित किया गया है। विभिन्न राज्यों से आए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बुनकर अपनी पारंपरिक साड़ियाँ, दुपट्टे, शॉल और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री कर रहे हैं।

‘वीव्स ऑफ इंडिया फेस्टिवल’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और बुनकरों की पीढ़ियों से चली आ रही कला का उत्सव है। इसका उद्देश्य भारतीय हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों को व्यापक मंच उपलब्ध कराना तथा देश की पारंपरिक बुनाई को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।


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