पेपर लीक बिल पर अखिलेश का हमला |
लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक रोकने वाले बिल पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग दान की राशि नहीं बचा पाए, वे पेपर लीक कैसे रोक पाएंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि वह दूर से छात्रों का विरोध-प्रदर्शन देख रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद लगाए गए नारे सरकार के खिलाफ थे। उनके मुताबिक, सरकार कहती थी कि वह किसी के सामने नहीं झुकती, लेकिन जब जनता का दबाव बढ़ता है तो सरकार को अपनी मांगें माननी पड़ती हैं।
उन्होंने कहा कि यह पहला छात्र आंदोलन था जिसे अभिभावकों का भी समर्थन मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) काम करती है, उसी तरह पूरी सरकार को भी आउटसोर्स करने का खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने भर्तियों में दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकार छीन लिए हैं।
एसपी प्रमुख ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री को बचाने के लिए शिक्षा मंत्री को हटाया। उन्होंने छात्रों के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि इसी आंदोलन की वजह से सरकार को विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देनी पड़ी, जबकि पहले ऐसा समय भी था जब प्रदर्शन करने तक की इजाजत नहीं दी जाती थी।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इससे उन्हें इमरजेंसी के दिनों की याद आ गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने इमरजेंसी नहीं देखी, लेकिन पिछले सप्ताह दिल्ली में छात्रों को नुकीली छड़ों, इलेक्ट्रिक बैटन से पीटे जाने और उन पर पैलेट गन चलाए जाने की घटनाओं ने वैसी ही तस्वीर दिखाई।
उन्होंने नए कानून की जरूरत पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि 2024 में कानून बनने के बाद भी पेपर लीक नहीं रुके, इसलिए अब सरकार को उसमें संशोधन लाना पड़ रहा है।
अखिलेश यादव ने राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामले का फिर जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार न तो चंदे की कथित चोरी रोक पाई और न ही पेपर लीक। उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने राम मंदिर के चंदे की चोरी होने दी, वे ही पेपर लीक भी होने दे रहे हैं।"