रांची अवैध शराब छापेमारी |
झारखंड की राजधानी रांची में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी की। इस कार्रवाई में बिहार के पूर्व एमएलसी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता सुबोध राय, उनके चालक देवेंद्र भगत और एक कर्मचारी रविकांत राय को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद बुधवार शाम तीनों को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।
रातभर चली कार्रवाई, अवैध शराब बनाने का आरोप
छापेमारी का नेतृत्व सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह ने किया। यह अभियान मंगलवार रात करीब 12 बजे शुरू हुआ और बुधवार सुबह 6 बजे तक चला।
जांच में आरोप सामने आया कि प्लांट में नामी कंपनियों के ब्रांड की तर्ज पर अवैध शराब तैयार की जा रही थी। इसके बाद इन बोतलों पर दूसरे प्रसिद्ध ब्रांडों के फर्जी लेबल लगाकर उन्हें बाजार में आधी कीमत पर बेचा जा रहा था।
तीन ब्रांड की अवैध शराब बनाई जा रही थी
उत्पाद विभाग की जांच में पता चला कि प्लांट में 8 पीएम, आफ्टर डार्क और एक अन्य ब्रांड की शराब तैयार की जा रही थी।
इन बोतलों पर "For Sale in Uttar Pradesh" और "For Sale in Delhi" के लेबल लगाए गए थे। विभाग का मानना है कि इन्हीं लेबलों के जरिए शराब की बिक्री की जा रही थी।
भारी मात्रा में शराब और बीयर जब्त
छापेमारी के दौरान टीम ने बड़ी मात्रा में शराब और बीयर बरामद की। जब्त सामग्री में शामिल हैं—
- किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर – 70 पेटी (प्रत्येक पेटी में 24 कैन)
- आफ्टर डार्क ब्लू – 218 पेटी (प्रत्येक पेटी में 48 बोतल)
- 8 पीएम – 7 पेटी (प्रत्येक पेटी में 48 बोतल)
- रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की – 78 पेटी
जांच में यह भी पाया गया कि आफ्टर डार्क और 8 पीएम की बोतलों पर "For Sale in Uttar Pradesh", जबकि रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की पर "For Sale in Delhi" लिखा हुआ था।
दो साल पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस प्लांट पर कार्रवाई हुई हो। करीब दो वर्ष पहले भी उत्पाद विभाग ने यहां छापेमारी कर फैक्ट्री को सील किया था। इसके बावजूद दोबारा यहां अवैध गतिविधियां मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कौन हैं सुबोध राय?
सुबोध राय बिहार के वैशाली जिले के गोरौल थाना क्षेत्र के पोझा गांव के रहने वाले हैं।
वर्ष 2015 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उन्हें वैशाली स्थानीय प्राधिकरण से विधान परिषद चुनाव का उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने उस चुनाव में एनडीए समर्थित अजय कुशवाहा को हराकर जीत हासिल की थी।
छह साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने पार्टी में मजबूत पहचान बनाई और उस समय विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे।
हालांकि, 2022 के विधान परिषद चुनाव में उन्हें एनडीए समर्थित रालोजपा उम्मीदवार भूषण राय से हार का सामना करना पड़ा।
पहले से दर्ज हैं कई मामले
जानकारी के अनुसार, सुबोध राय के खिलाफ गोरौल, महुआ और नगर थाना में उत्पाद अधिनियम से जुड़े कई मामले पहले से दर्ज हैं। इसके अलावा उन पर विद्युत अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ शराब तस्करी और अवैध कारोबार से जुड़े मामलों की भी पहले जांच हो चुकी है।
भाई ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
सुबोध राय के भाई और पोझा पंचायत के मुखिया विकास राय ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बुधवार रात करीब 9:30 बजे उनकी सुबोध राय से बातचीत हुई थी और उस समय ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि जिस कार्रवाई की बात कही जा रही है, वह सुबोध जायसवाल के खिलाफ की गई है।
फिलहाल पुलिस और उत्पाद विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।