मायावती दीपिका आनंद बसपा जिम्मेदारी |
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी और अपने परिवार को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब उनके भाई आनंद कुमार के बेटे नहीं, बल्कि उनकी बेटी दीपिका आनंद बसपा के मिशन को आगे बढ़ाने का काम करेंगी। मायावती ने साफ कहा कि आनंद कुमार के बेटों को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती के मुताबिक, दीपिका आनंद फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार अपनी जिम्मेदारियां उन्हें सौंप सकते हैं। उन्होंने कहा कि आनंद अपने दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों में से किसी को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं देंगे।
मायावती ने कहा कि अगर उनकी बेटी यह जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आम सहमति से दलित समाज के किसी दूसरे मिशनरी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह उनका अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा है कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे या बड़े किसी भी राजनीतिक पद पर काम करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बसपा का मिशन उनके लिए सबसे ऊपर है और वह किसी को भी पार्टी के मिशन में रुकावट नहीं बनने देंगी। मायावती ने कहा कि उन्होंने अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के युवाओं को सांसद, विधायक, मंत्री या दूसरे राजनीतिक लाभ वाले पदों से हमेशा दूर रखा है।
मायावती ने यह भी बताया कि अविवाहित होने और अपनी सुरक्षा व देखभाल की जरूरत के कारण उन्हें अपने छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा। आनंद उनकी देखभाल के साथ-साथ उनकी निगरानी में लंबे समय से पार्टी की अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। लेकिन अब उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ मिले, यह पार्टी और आंदोलन के हित में सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवारवाद के खिलाफ रहे और उनकी शिष्या होने के नाते वह भी इसी विचार पर कायम हैं। मायावती ने कहा कि अगर वह लड़की नहीं होतीं तो कांशीराम की तरह अपने भाई-बहनों में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखतीं। उन्होंने कहा कि अब आनंद कुमार के बच्चों के बड़े और शादीशुदा होने के बाद उन्हें भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वह किसी व्यक्तिगत मोह के कारण पार्टी को नुकसान नहीं होने देंगी।
संगठन और सरकार में भी परिवारवाद पर रोक
मायावती ने कहा कि संगठन में या भविष्य में बसपा की सरकार बनने पर भी किसी एक व्यक्ति को ही जिम्मेदारी दी जाएगी। उस व्यक्ति की आड़ में उसके परिवार के किसी दूसरे सदस्य को कोई राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी को परिवारवाद से मुक्त रखना जरूरी है, ताकि सर्वसमाज के ज्यादा से ज्यादा लोग सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जुड़ सकें।
मायावती ने बताया कि बसपा में युवाओं को प्राथमिकता देने की नीति के तहत खासकर उत्तर प्रदेश में जेन-जी को करीब 50 प्रतिशत तक संगठन में भागीदारी देने की प्रक्रिया चल रही है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में भी सर्वसमाज के मेहनती और युवा लोगों को उम्मीदवार बनाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
बसपा सरकार के कामों का भी किया जिक्र
मायावती ने कहा कि बसपा की सरकारों के दौरान बुनियादी जरूरतों के साथ जेन-जी और जेन-अल्फा की जरूरतों पर भी काम किया गया। उनके मुताबिक, इस दौरान कई स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क बनाए गए।
उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों के जातिवादी रवैये के कारण वर्ष 2012 में बसपा की सरकार पांचवीं बार नहीं बन सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को आज भी है।
मायावती ने आरोप लगाया कि बसपा सरकार जाने के बाद पूरे प्रदेश में कानून का राज कायम नहीं है और लोगों का जीवन परेशानियों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि विकास के सरकारी दावे लोगों की समस्याएं और पेट की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को प्राथमिकता दी जाए और युवाओं के साथ-साथ महिला एवं पुरुष दोनों प्रतिभाओं को मौका दिया जाए।
विरोधी दलों के प्रचार से सावधान रहने की अपील
मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों, संगठनों, जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रहे कथित साजिश, प्रायोजित और पेड प्रोपेगेंडा से सावधान रहने को कहा।
उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह प्रचार किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बसपा से निकाले गए लोगों को दोबारा पार्टी में शामिल किया जाएगा। मायावती ने इसे पूरी तरह गलत और मिथ्या प्रचार बताया।
उन्होंने साफ कहा कि ऐसे लोगों को किसी भी स्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा।