दतिया उपचुनाव में BJP को झटका |
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6 हजार से अधिक वोटों से हराकर जीत दर्ज की। इस नतीजे को भाजपा के मजबूत गढ़ में बड़ी राजनीतिक हार माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में भाजपा का सबसे बड़ा फैसला पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाना रहा। इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष देखने को मिला। चुनाव प्रचार के दौरान भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और भीतरघात की चर्चाएं लगातार होती रहीं।
दतिया में भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को हार की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कई कार्यकर्ता प्रचार में पूरी तरह सक्रिय नहीं रहे और कुछ स्थानों पर पार्टी के खिलाफ काम करने की भी चर्चा रही।
मतदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण इलाकों में वोटिंग का प्रतिशत काफी अधिक रहा। कई बूथों पर 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान दर्ज किया गया, जबकि शहर के कई मतदान केंद्रों पर वोटिंग 55 प्रतिशत से भी कम रही। सबसे कम मतदान बूथ संख्या 110 पर 43.20 प्रतिशत दर्ज हुआ। वहीं मतगणना के तीसरे राउंड से ही कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह लगातार बढ़त बनाए रहे।
2023 विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया था। उन्होंने गांव-गांव और वार्ड-वार्ड जाकर लोगों से मुलाकात की और टिकट घोषित होने से पहले ही चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। हालांकि पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार किया।
टिकट कटने के बाद भाजपा की पहली बड़ी सभा में डॉ. नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए थे। उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं से भाजपा उम्मीदवार को जिताने की अपील की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने कार्यकर्ताओं के बीच भावनात्मक माहौल तो बनाया, लेकिन नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया ने इस नतीजे को भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ा संकेत बताया। उनके अनुसार, दतिया जैसे क्षेत्र में जनाधार वाले नेता की जगह सर्वे के आधार पर उम्मीदवार बदलने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यदि ऐसे फैसले लिए गए तो इसी तरह के नतीजे सामने आ सकते हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह जीत राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। लंबे समय से भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली इस सफलता से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। वहीं भाजपा के लिए यह परिणाम आगामी चुनावों से पहले संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का संकेत माना जा रहा है।