झारखंड राज्य सभा नाथवानी नामांकन वैध |
झारखंड राज्यसभा चुनाव की दो सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है। उनके नामांकन पत्र पर कांग्रेस की ओर से उठाई गई आपत्तियों को विधानसभा प्रभारी सचिव एवं रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार ने खारिज कर दिया है। आवश्यक स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद नाथवानी का नामांकन वैध घोषित कर दिया गया।
जांच के दौरान नामांकन रखा गया था होल्ड पर
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान परिमल नाथवानी के दस्तावेजों में कथित तौर पर तीन बिंदुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इन आपत्तियों के मद्देनजर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन को तत्काल मंजूरी देने के बजाय होल्ड पर रखा था और संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था।
जवाब से संतुष्ट हुआ निर्वाचन अधिकारी
बाद में परिमल नाथवानी की ओर से मांगे गए सभी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया। रिटर्निंग ऑफिसर ने जवाबों का परीक्षण करने के बाद उन्हें संतोषजनक माना और उनके नामांकन पत्र को वैध घोषित कर दिया। इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा दर्ज कराई गई सभी आपत्तियों को भी निरस्त कर दिया गया।
चुनावी मैदान में अब तीन उम्मीदवार
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्यसभा चुनाव के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी शामिल हैं।
विधानसभा का गणित क्या कहता है?
राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर गठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में दिखाई देता है। हालांकि परिमल नाथवानी के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नाथवानी के सामने संख्या बल की चुनौती
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास विधानसभा में 24 विधायक हैं। ऐसे में परिमल नाथवानी को जीत हासिल करने के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम काफी हद तक प्राथमिकता वोटों और विभिन्न दलों के विधायकों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
अटकलों के बीच परिणामों का इंतजार
चुनावी माहौल के बीच विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। हालांकि विधायकों की खरीद-फरोख्त या हॉर्स ट्रेडिंग से जुड़े किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे दावे फिलहाल केवल राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों तक सीमित हैं। अंतिम तस्वीर मतदान और चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सलमान खुर्शीद ने रखा कांग्रेस का पक्ष
नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी रांची पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से रांची इसलिए आए थे ताकि कांग्रेस का पक्ष और उसके तर्क प्रस्तुत कर सकें। हालांकि उनके अनुसार जब वह लगभग 12:30 बजे पहुंचे, तब तक सुनवाई समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि अदालत ने कहा कि इस विषय पर पक्ष की बात पर्याप्त रूप से सुनी जा चुकी है।
कांग्रेस ने दस्तावेजों में कमियों का लगाया आरोप
कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान परिमल नाथवानी के दस्तावेजों में कई खामियां पाई गईं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के नाम के उल्लेख में भी विसंगति थी, जहां ‘परिमल नाथवानी’ के स्थान पर ‘नाथवानी परिमल’ लिखा गया था।
चौहान के अनुसार, ‘चुनाव संचालन नियम, 1961’ के नियम 4ए के तहत दाखिल किए जाने वाले फॉर्म-26 में उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, जीवनसाथी, परिवार और आश्रितों से संबंधित संपूर्ण जानकारी देना अनिवार्य होता है। उनका आरोप है कि नाथवानी के हलफनामे में कई कॉलम खाली छोड़े गए थे तथा केवल उनकी और उनकी पत्नी की जानकारी दर्ज की गई थी। इसी आधार पर कांग्रेस ने हलफनामे को त्रुटिपूर्ण और कानूनी रूप से अमान्य बताते हुए उनका नामांकन रद्द करने की मांग की थी।
हालांकि रिटर्निंग ऑफिसर ने प्रस्तुत स्पष्टीकरणों को संतोषजनक मानते हुए कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज कर दिया और परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी को वैध घोषित कर दिया।