Saturday, September 05, 2026 02:14:27 AM

बीजेपी की नई टीम में दो मुस्लिम चेहरे
BJP की नई टीम में दो मुस्लिम चेहरे, कौन हैं तारिक मंसूर और बासित अली?

BJP की नई राष्ट्रीय टीम में डॉ. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। जानिए दोनों नेताओं का राजनीतिक सफर और यूपी चुनाव से इसका क्या कनेक्शन है।

bjp की नई टीम में दो मुस्लिम चेहरे कौन हैं तारिक मंसूर और बासित अली
बीजेपी की नई टीम में दो मुस्लिम चेहरे |

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए 65 पदाधिकारियों की नई टीम का ऐलान किया है। इस नई टीम में उत्तर प्रदेश को भी खास जगह मिली है। खास बात यह है कि बीजेपी ने दो मुस्लिम नेताओं—डॉ. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को बड़ी जिम्मेदारी दी है।

डॉ. तारिक मंसूर को एक बार फिर बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वे उत्तर प्रदेश से आते हैं और इस समय यूपी विधान परिषद के सदस्य हैं। अप्रैल 2023 में उन्हें योगी सरकार ने एमएलसी मनोनीत किया था।

तारिक मंसूर का जन्म 20 सितंबर 1956 को अलीगढ़ में हुआ। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से MBBS और सर्जरी में MS की पढ़ाई की। वह लंबे समय तक डॉक्टर और प्रोफेसर रहे। साल 2017 में उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया था। इसके बाद 2023 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की।

दूसरा बड़ा नाम है कुंवर बासित अली। उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे।

बासित अली का जन्म मेरठ के कायस्थ बड्ढा गांव में हुआ। उन्होंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की और बाद में होटल कारोबार शुरू किया। राजनीति में उन्होंने 2011 में बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे के मंडल अध्यक्ष के तौर पर शुरुआत की। इसके बाद वह जिला अध्यक्ष और संगठन के कई दूसरे पदों पर रहे। 20 जून 2021 को उन्हें यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।

आखिर दोनों को बड़ी जिम्मेदारी क्यों?

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी के लिए संगठन को मजबूत करना काफी अहम है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी की सीटें 2019 की 62 से घटकर 33 रह गई थीं।

ऐसे में पार्टी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। नई राष्ट्रीय टीम में यूपी से आठ लोगों को जगह मिली है, जिनमें ये दोनों मुस्लिम चेहरे भी शामिल हैं।

तारिक मंसूर और बासित अली के जरिए बीजेपी मुस्लिम समाज के अलग-अलग सामाजिक और जातीय समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकती है। तारिक मंसूर को पसमांदा मुस्लिम समाज से और बासित अली को मुस्लिम राजपूत समुदाय से जोड़ा जाता है।

पसमांदा मुस्लिम कौन हैं?

पसमांदा फारसी शब्द है, जिसका मतलब है ‘पीछे छूटा हुआ’। भारत में इस शब्द का इस्तेमाल मुख्य रूप से पिछड़े और कमजोर सामाजिक वर्गों से जुड़े मुस्लिम समुदायों के लिए किया जाता है।

बीजेपी पिछले कुछ समय से मुस्लिम समाज को एक ही वोट बैंक मानने के बजाय अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश करती रही है। नई टीम में इन दोनों नेताओं को जिम्मेदारी देना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


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