Friday, August 14, 2026 08:15:47 AM

योगी हनुमानगढ़ी नमाज विवाद
अयोध्या की हनुमानगढ़ी में नमाज-इफ्तार का मुद्दा फिर गरमाया, सीएम योगी के बयान से सियासी बहस तेज

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान 2003 में हनुमानगढ़ी में हुए नमाज और इफ्तार कार्यक्रम का मुद्दा उठाया। बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

अयोध्या की हनुमानगढ़ी में नमाज-इफ्तार का मुद्दा फिर गरमाया सीएम योगी के बयान से सियासी बहस तेज
योगी हनुमानगढ़ी नमाज विवाद |

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान एक बार फिर हनुमानगढ़ी मंदिर में नमाज पढ़े जाने और इफ्तार कार्यक्रम का मुद्दा उठाया है। राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर चल रही चर्चा के बीच सीएम योगी के इस बयान से सियासी हलचल बढ़ गई है।

दरअसल, पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भाजपा की हिंदुत्व राजनीति को लेकर सॉफ्ट हिंदुत्व के जरिए घेरते नजर आ रहे हैं। इसी बीच सीएम योगी ने साल 2003 के अयोध्या हनुमानगढ़ी इफ्तार और नमाज विवाद का जिक्र कर पुराने मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया।

सीएम योगी ने क्या कहा?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर दान मामले को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आस्था की बात करते हैं, उन्हें याद करना चाहिए कि पहले हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का काम किया गया था।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसी मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कराया जा सकता है? क्या सरकारें ऐसा करवा सकती हैं? उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा संभव नहीं है तो फिर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज क्यों पढ़वाई गई?

सीएम योगी ने कहा कि पहले अयोध्या की स्थिति अलग थी और सरयू घाट तक पहुंचना मुश्किल था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत अयोध्या का विकास हुआ है और शहर सोलर सिटी के रूप में आगे बढ़ रहा है।

क्या हुआ था साल 2003 में?

साल 2003 में अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के बीच दोनों समुदायों के बीच संवाद और शांति की कोशिशें तेज हुई थीं।

इसी पहल के तहत हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास के आश्रम में रोजा-इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मुस्लिम पक्ष से बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी और मुस्लिम नेता सादिक अली उर्फ बाबू टेलर समेत कई लोग शामिल हुए थे।

इस कार्यक्रम को हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और आपसी विश्वास बढ़ाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, बाद में आरोप लगे कि इस दौरान हनुमानगढ़ी परिसर में नमाज भी पढ़ी गई, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

कोर्ट तक पहुंचा था मामला

हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने इस मामले को अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में इस तरह के आयोजन नहीं होने चाहिए।

मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में हुई। कोर्ट ने हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा-इफ्तार आयोजन पर रोक लगा दी। इसके बाद यह मुद्दा धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

साल 2005 तक इस मामले को लेकर तनाव की स्थिति बनी रही।

बाद में बंद हुआ इफ्तार कार्यक्रम

विवाद बढ़ने के बाद महंत ज्ञान दास ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि भविष्य में हनुमानगढ़ी परिसर में ऐसा आयोजन नहीं कराया जाएगा।

हालांकि, साल 2019 में अयोध्या के वशिष्ठ कुंड क्षेत्र स्थित सरयू कुंज मंदिर में रोजा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

अब सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा इस पुराने मुद्दे को फिर उठाने के बाद अयोध्या की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है।


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