यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 संपन्न |
ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट (आईईएमएल) में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) का चौथा संस्करण मंगलवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। वर्ष 2023 में योगी सरकार द्वारा शुरू की गई यह पहल अब उत्तर प्रदेश के उद्योग, उद्यमिता, निर्यात और वैश्विक कारोबार को एक मंच पर लाने का प्रमुख माध्यम बन गई है।
एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट, बेहतर हवाई संपर्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के दम पर यह ट्रेड प्लेटफॉर्म प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।
'ब्रांड यूपी' को वैश्विक बाजार में मिली नई पहचान
राज्य सरकार ने ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद), एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगार को आर्थिक विकास का आधार बनाया है। यूपीआईटीएस इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए प्रदेश के हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को विदेशी खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।
वर्ष 2025 में आयोजित ट्रेड शो में 80 देशों की भागीदारी के साथ 288 एमओयू हुए थे, जिनकी कुल कीमत 89 करोड़ रुपये बताई गई थी। वहीं, 2026 के चौथे संस्करण में पिछले रिकॉर्ड पीछे छूट गए। इस बार 2,400 से अधिक प्रदर्शकों, 90 देशों और 550 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने हिस्सा लिया।
वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस जैसे छह साझेदार देशों की भागीदारी ने आयोजन के अंतरराष्ट्रीय दायरे को और विस्तार दिया।
2003 की नींव से ग्लोबल बिजनेस हब तक का सफर
वर्ष 2003 में इंडिया एक्सपो मार्ट की आधारशिला रखी गई थी। समय के साथ यह परिसर एक बड़े वैश्विक कारोबारी केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यहां प्रदर्शनी सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
मार्च 2024 तक परिसर में 14 प्रदर्शनी हॉल थे, जिनकी संख्या 2026 तक बढ़कर 16 हो गई। इसका ऑपरेशनल एरिया 17.87 प्रतिशत बढ़कर 76,484 वर्गमीटर तक पहुंच गया है।
आज इस परिसर में हस्तशिल्प से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, फार्मा और औद्योगिक तकनीक जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियां एक ही छत के नीचे अपने उत्पादों और कारोबार का प्रदर्शन कर रही हैं।
'लोकल से ग्लोबल' तक सालभर कारोबार का अवसर
यूपीआईटीएस का कारोबारी दायरा केवल पांच दिन के आयोजन तक सीमित नहीं है। इंडिया एक्सपो मार्ट के स्थायी मार्ट में 31 जुलाई 2026 तक 1,800 शो-रूम और 774 निर्यातकों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
'मार्ट सोर्सिंग डेज' जैसे आयोजनों के जरिए विदेशी खरीदारों और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को पूरे साल एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर मिलता है।
डिजिटल कारोबार को बढ़ावा देने के लिए 'एक्सपो डिजिटल इंडे' और 'एक्सपोबाजार' जैसे प्लेटफॉर्म भी शुरू किए गए हैं। इनका उद्देश्य भारतीय उत्पादों को ऑनलाइन माध्यम से वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ना है।
अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
यूपीआईटीएस जैसे बड़े आयोजनों का लाभ केवल प्रदर्शकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे जुड़े कई अन्य क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। ऐसे आयोजनों के कारण स्थानीय होटल, परिवहन, कैटरिंग, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा सेवाओं की मांग में वृद्धि होती है।
एक्सपो मार्ट ने प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ हजारों बाहरी सेवा प्रदाताओं के लिए भी आजीविका के अवसर पैदा किए हैं।
भविष्य की योजनाओं के तहत इंडिया एक्सपो मार्ट ने हॉल संख्या 4 और 6 के नवीनीकरण तथा हॉल 18 के विकास की कार्ययोजना तैयार की है। इसके अलावा 'मनी अल्फा 360°' और 'भारत सस्टेनेबिलिटी एक्सपो' जैसे नए आयोजनों के जरिए ग्रेटर नोएडा को वैश्विक कारोबारी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।