SSC परीक्षा धांधली में दो डायरेक्टर गिरफ्तार |
ग्रेटर नोएडा। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित नकल और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा में गड़बड़ी के मामले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क से जुड़े इस मामले में एसटीएफ ने ASSESS Infra Private Limited के दो डायरेक्टर गगनदीप शर्मा और यादवेंद्र सिंह को 22 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
बालाजी डिजिटल जोन से शुरू हुई थी जांच
मामला नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित बालाजी डिजिटल जोन कंप्यूटर लैब से जुड़ा है। 22 मई 2026 को एसटीएफ ने यहां छापेमारी कर SSC परीक्षा में कथित तौर पर प्रॉक्सी सर्वर और सर्वर हैकिंग के जरिए नकल कराने वाले गिरोह का खुलासा किया था।
उस दौरान मुख्य आरोपी बताए गए प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एसटीएफ के मुताबिक, मौके से करीब 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए थे।
इसके बाद जांच का दायरा नकल कराने वाले गिरोह से आगे बढ़कर परीक्षा केंद्रों के चयन और उनकी सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच गया।
2025 से हो चुकी थीं SSC की 16 परीक्षाएं
एसटीएफ की जांच के मुताबिक, ASSESS Infra ने बालाजी डिजिटल जोन को SSC परीक्षा केंद्र के रूप में चुना था। इस केंद्र पर वर्ष 2025 से अब तक SSC की 16 परीक्षाएं आयोजित हो चुकी थीं।
एसटीएफ का आरोप है कि इन परीक्षाओं के लिए ASSESS Infra की ओर से बालाजी डिजिटल जोन को निर्धारित शुल्क नहीं दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि भुगतान नहीं किए जाने के बदले केंद्र पर सुरक्षा नियमों की कथित तौर पर अनदेखी होती थी और इसी का फायदा उठाकर केंद्र संचालक अभ्यर्थियों से पैसे लेकर अनुचित सहायता उपलब्ध कराता था। हालांकि इन आरोपों का अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
परीक्षा केंद्र चुनने वाली कंपनी तक कैसे पहुंची जांच?
SSC परीक्षाओं के संचालन से संबंधित काम Eduquity के माध्यम से कराया जाता था। जांच के अनुसार, उत्तर भारत में परीक्षा केंद्रों की पहचान और चयन, सिक्योरिटी ऑडिट तथा केंद्र संचालकों और स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन करने की जिम्मेदारी ASSESS Infra को दी गई थी।
इसी कारण बालाजी डिजिटल जोन में कथित नकल सामने आने के बाद एसटीएफ ने परीक्षा केंद्र चुनने और उसकी सुरक्षा जांच की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल शुरू की।
देहरादून मामले से भी जुड़ा कनेक्शन
एसटीएफ की जांच में अप्रैल 2026 में देहरादून के महादेव डिजिटल जोन में सामने आए कथित नकल मामले का भी जिक्र है। वहां भी प्रॉक्सी सर्वर के जरिए अभ्यर्थियों को नकल कराने का आरोप सामने आया था और प्रदीप चौहान को मुख्य आरोपी बताया गया था।
एसटीएफ के मुताबिक, इसकी जानकारी होने के बावजूद प्रदीप चौहान से जुड़ी ग्रेटर नोएडा की दूसरी लैब बालाजी डिजिटल जोन को दोबारा परीक्षा केंद्र बनाया गया। जांच एजेंसी इस कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।
सात राज्यों तक संदिग्ध केंद्रों की जांच
मामले की जांच अब ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं है। एसटीएफ की जांच में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली के दर्जनों संदिग्ध परीक्षा केंद्रों के नाम सामने आने की बात कही गई है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा केंद्रों के चयन, सुरक्षा व्यवस्था और कथित सॉल्वर नेटवर्क के बीच किस स्तर पर संपर्क था।
लाखों रुपये लेकर नकल कराने का आरोप
शुरुआती जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के बदले लाखों रुपये लिए जाते थे और इसके लिए प्रॉक्सी सर्वर, स्क्रीन शेयरिंग और अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था।
कुछ रिपोर्टों में प्रति अभ्यर्थी करीब चार लाख रुपये तक लेने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि रकम और आरोपियों की भूमिका से जुड़े अंतिम तथ्य जांच और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अब तक 10 गिरफ्तारी, जांच जारी
मामला थाना नॉलेज पार्क, गौतमबुद्धनगर में दर्ज है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ BNS, IT Act, उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
अब एसटीएफ यह भी जांच रही है कि ASSESS Infra द्वारा चुने गए दूसरे परीक्षा केंद्रों पर भी इसी तरह की सुरक्षा संबंधी अनियमितताएं हुई थीं या नहीं। ग्रेटर नोएडा से शुरू हुई जांच अब परीक्षा केंद्र चुनने वाली कंपनी, केंद्र संचालकों, तकनीकी नेटवर्क और कथित सॉल्वर गिरोह के पूरे कनेक्शन तक पहुंच गई है।