Sunday, August 16, 2026 09:47:48 AM

मामूरा खुले नाले में बुजुर्ग की मौत
नोएडा के मामूरा में खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग की मौत, जांच में जुटी पुलिस

नोएडा के मामूरा में खुले नाले में गिरने से 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। घटना के बाद खुले नालों की सुरक्षा पर फिर सवाल उठे हैं।

नोएडा के मामूरा में खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग की मौत जांच में जुटी पुलिस
मामूरा खुले नाले में बुजुर्ग की मौत |

सेक्टर-66 के मामूरा इलाके में बुधवार सुबह खुले नाले में गिरने से 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक की पहचान रुमाल सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मेरठ के रहने वाले थे और फिलहाल मामूरा में रह रहे थे। घटना सुबह करीब 9:30 बजे गली नंबर-6 स्थित ओम अस्पताल के पास ट्रांसफॉर्मर के नजदीक हुई।

पुलिस के अनुसार, डायल-112 पर नाले में एक व्यक्ति के शव की सूचना मिलने के बाद थाना फेज-3 पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाया। घटनास्थल का निरीक्षण फोरेंसिक टीम ने भी किया। शुरुआती जांच में मृतक के शरीर पर किसी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस का मानना है कि बुजुर्ग की मौत नाले में डूबने से हो सकती है। हालांकि, मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

एसीपी दीक्षा सिंह ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आसपास के लोगों और परिजनों से भी जानकारी जुटा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रुमाल सिंह संभवतः नाले के किनारे लघुशंका कर रहे थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह मुंह के बल नाले में गिर गए। लोगों के अनुसार, उनका शरीर भारी होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सके। परिजनों ने पुलिस को बताया कि वह रोज घर से मोबाइल लेकर निकलते थे, लेकिन घटना वाले दिन बिना मोबाइल के घर से निकले थे। पोस्टमार्टम के बाद परिजन उनका शव लेकर मेरठ रवाना हो गए।

इस बीच, नोएडा प्राधिकरण ने पुलिस के दावे पर अलग पक्ष रखा है। वर्क सर्कल-5 के प्रभारी राजकमल सिंह ने कहा कि जिस स्थान से शव मिलने की बात कही जा रही है, वहां बड़ा नाला नहीं बल्कि एक छोटी नाली है। उनके अनुसार, उस नाली की गहराई कम है और उसमें गिरने से किसी की मौत होना संभव नहीं लगता। साथ ही उन्होंने बताया कि वहां जलभराव की स्थिति भी नहीं थी।

इस हादसे के बाद शहर में खुले नालों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नोएडा के कई इलाकों में आज भी नाले बिना रेलिंग, ढक्कन या सुरक्षा दीवार के खुले पड़े हैं। बरसात के समय ऐसे स्थान और अधिक खतरनाक हो जाते हैं। इससे पहले भी खुले नालों और असुरक्षित गड्ढों में गिरने से कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन स्थायी सुरक्षा इंतजाम अब तक नहीं हो सके हैं।

बीते वर्षों में भी ऐसे कई हादसे सामने आए हैं। 9 जुलाई 2026 को सेक्टर-58 में टूटी स्लैब के कारण नाले में गिरने से इंजीनियर आर्यन की मौत हुई थी। 16 जनवरी 2026 को सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई थी। 8 अप्रैल 2026 को सेक्टर-94 में निर्माण स्थल पर बने पानी से भरे गड्ढे में डूबने से छात्र हर्षित भट्ट की मौत हुई थी। इससे पहले 17 दिसंबर 2024, 27 दिसंबर 2021 और 2 मई 2018 को भी खुले नालों में गिरने से कई लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं। 


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