Saturday, October 10, 2026 10:32:53 PM

नोएडा यमुना सफाई एक्शन प्लान
यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की तैयारी, नोएडा में नालों पर लगाए जाएंगे नए STP

यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नोएडा में 24 नालों पर STP लगाने की योजना, मुख्य सचिव की बैठक में एक्शन प्लान पर जोर।

यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की तैयारी नोएडा में नालों पर लगाए जाएंगे नए stp
नोएडा यमुना सफाई एक्शन प्लान |

यमुना को प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में नोएडा प्राधिकरण ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें यमुना की सफाई को लेकर विस्तृत एक्शन प्लान और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

नोएडा क्षेत्र में यमुना का करीब 17 किलोमीटर हिस्सा आता है। यहां कोंडली नाला प्रमुख जल निकासी मार्ग है, जिसमें शहर के कई छोटे-बड़े नालों का पानी पहुंचता है और आगे यह पानी यमुना में जाता है। पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी कोंडली ड्रेन के नोएडा क्षेत्र में करीब 17 किलोमीटर तक बहने और यमुना में मिलने का उल्लेख है।

24 नालों पर ट्रीटमेंट की योजना

प्राधिकरण के मुताबिक, नालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से शोधित पानी ही छोड़े जाने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही नालों के पानी को यमुना तक पहुंचने से पहले ट्रीट करने के लिए अतिरिक्त प्लांट लगाने की योजना भी तैयार की गई है।

अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी के अनुसार, योजना के तहत 24 नालों पर STP लगाए जाने हैं। इनमें से 8 स्थानों पर व्यवस्था की जा चुकी है, जबकि अन्य स्थानों पर काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ नए STP 2027 तक और बाकी दिसंबर 2028 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा तीन फाइटो-ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने की भी योजना बताई गई है। 13 प्रस्तावित STP में से पांच की DPR की तकनीकी जांच IIT दिल्ली से कराई जा रही है। प्राधिकरण का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नालों में पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी और COD तथा BOD स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

केंद्र का 18,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्लान

यमुना की सफाई को लेकर केंद्र सरकार ने भी 18,600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला नेशनल एक्शन प्लान तैयार किया है। सुप्रीम कोर्ट के 21 मई 2026 के आदेश के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट में यमुना कैचमेंट क्षेत्र में प्रतिदिन 7,999.63 MLD घरेलू सीवेज उत्पन्न होने की बात कही गई है। इसमें 6,243.83 MLD का उपचार किया जा रहा है, जबकि 1,755.80 MLD का ट्रीटमेंट गैप बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट का गैप सबसे बड़ा बताया गया है। यमुना बेसिन में बड़ी संख्या में ऐसे नालों की पहचान की गई है, जिनके जरिए प्रदूषित पानी नदी तक पहुंचने का खतरा बना हुआ है। गौतमबुद्ध नगर समेत गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, गुरुग्राम और फरीदाबाद को प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट में शामिल किया गया है।

कोंडली ड्रेन को लेकर भी सामने आई चिंता

यमुना प्रदूषण की चुनौती सिर्फ सीवेज तक सीमित नहीं है। हाल ही में UPPCB की जांच में कोंडली ड्रेन के आसपास नगर निगम और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा जमा पाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे बारिश के दौरान कचरे के ड्रेन में पहुंचने और प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई गई।

ऐसे में नोएडा में नए STP, नालों की निगरानी और कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले समय में अहम होगा। यमुना की सफाई के लिए योजनाएं तो कई स्तर पर तैयार हैं, लेकिन असली चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर लागू करने और नालों में प्रदूषित पानी की एंट्री रोकने की है।


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