स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नोएडा 8वें स्थान पर |
हाइटेक सिटी नोएडा भले ही स्वच्छ हवा की रैंकिंग में एक पायदान ऊपर आया हो, लेकिन शहर में प्रदूषण कम करने के जमीनी प्रयासों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पर्यावरण मंत्रालय के ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026’ में नोएडा को 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी यानी कैटेगरी-2 में 8वीं रैंक मिली है। हालांकि, पड़ोसी शहर गाजियाबाद और फरीदाबाद के बेहतर प्रदर्शन ने नोएडा के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
पिछली बार से एक पायदान ऊपर, लेकिन 2024 से पीछे
देश के 130 प्रमुख शहरों के बीच कराए गए ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026’ के नतीजे जारी हो चुके हैं।
नोएडा को इस बार 8वीं रैंक मिली है। पिछले सर्वेक्षण में नोएडा 9वें स्थान पर था, यानी इस बार एक पायदान का सुधार हुआ है।
लेकिन 2024 में नोएडा को 6वीं रैंक मिली थी। ऐसे में इस बार शहर अपनी पुरानी रैंकिंग तक भी नहीं पहुंच सका।
9 मानकों पर हुई शहरों की जांच
यह सर्वेक्षण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की निगरानी में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराया गया।
इसमें शहरों को 9 अलग-अलग मानकों पर परखा गया था।
NCR में फरीदाबाद और गाजियाबाद आगे
NCR के दूसरे शहरों ने इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है।
फरीदाबाद ने अपनी रैंकिंग में 5 पायदान की बड़ी छलांग लगाई।
वहीं, गाजियाबाद पिछले साल 10 पायदान आगे बढ़ा था और इस बार भी एक पायदान का सुधार करते हुए नोएडा से बेहतर स्थिति में रहा।
कहां चूक रहा है नोएडा?
NCAP बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम यानी NCAP के तहत केंद्र से मिलने वाला बड़ा बजट शहर में प्रदूषण कम करने के लिए पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाया। आरोप है कि बजट का एक हिस्सा प्राधिकरण के खातों में ही पड़ा रहा।
PM2.5 और PM10 पर नियंत्रण चुनौती
शहर की हवा में मौजूद जहरीले कणों PM2.5 और PM10 को नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस काम की कमी दिखाई दे रही है।
जागरूकता अभियानों की कमी
वायु प्रदूषण को कम करने में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए पर्याप्त जागरूकता अभियान भी नहीं चलाए गए। इससे सरकारी प्रयासों के केवल कागजों तक सीमित रहने पर सवाल उठ रहे हैं।
बजट होने के बावजूद हवा क्यों नहीं सुधरी?
नोएडा की रैंकिंग में मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन 2024 की 6वीं रैंक से पीछे जाना यह सवाल खड़ा करता है कि जब बजट मौजूद है, तो शहर की हवा साफ करने के लिए उसका पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा है?