अक्षय त्रिपाठी को 5 लाख नोटिस का दावा अफवाह |
ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षय त्रिपाठी को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ। दावा किया गया कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने के चलते अक्षय को 5 लाख रुपये का नोटिस दिया गया है। हालांकि, गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने इस दावे को अफवाह बताया है।
प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। जिलाधिकारी और जिला प्रशासन गौतमबुद्धनगर की ओर से अक्षय त्रिपाठी के खिलाफ इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
सोशल मीडिया पर क्या दावा किया गया?
सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने शांतिभंग से जुड़े मामले में अक्षय त्रिपाठी पर 5 लाख रुपये का नोटिस जारी किया है।
अक्षय त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI की उत्तर प्रदेश राज्य समिति के सदस्य भी हैं। इसी वजह से यह मामला छात्र संगठनों और राजनीति से भी जुड़ गया।
BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस का दावा
सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट-3 ने अक्षय त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया।
यह भी दावा किया गया कि यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक उप-निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर की गई।
छात्रों को उकसाने का आरोप
सोशल मीडिया पर वायरल दावे के मुताबिक, नोटिस में आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान अक्षय त्रिपाठी ने छात्रों को सरकार के खिलाफ उकसाने और उन्हें एकजुट करने की कोशिश की।
हालांकि, अक्षय ने इन आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि उन्होंने प्रदर्शन में पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में घायल होने का दावा
अक्षय त्रिपाठी ने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी, जिसके कारण वह नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल नहीं हो पा रहे थे।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हो गए थे।
SFI ने कथित नोटिस की निंदा की
वहीं, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने अक्षय त्रिपाठी को जारी किए गए कथित नोटिस की कड़ी निंदा की।
SFI ने इसे विरोध करने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे छात्रों को डराने और दबाव में लाने की कोशिश बताया।
संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन में पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था।
SFI ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस असहमति की आवाज को दबाने के लिए कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों का दुरुपयोग कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
SFI ने यह भी दावा किया कि जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अक्षय त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
संगठन ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है।
हालांकि, इन सभी दावों के बीच गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अक्षय त्रिपाठी पर 5 लाख रुपये का ऐसा कोई आदेश या नोटिस जिलाधिकारी और जिला प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है।