Saturday, October 10, 2026 11:25:33 PM

नोएडा सेक्टर-22 पाइपलाइन फटी
नोएडा सेक्टर-22 में फटी पानी की पाइपलाइन, सड़क पर बहा लाखों लीटर पानी; जलापूर्ति प्रभावित

नोएडा के सेक्टर-22 में पाइपलाइन फटने से लाखों लीटर पानी सड़क पर बह गया। मरम्मत के लिए मेन सप्लाई बंद की गई, जबकि स्थानीय लोगों ने पुरानी पाइपलाइन को बदलने की मांग उठाई है।

नोएडा सेक्टर-22 में फटी पानी की पाइपलाइन सड़क पर बहा लाखों लीटर पानी जलापूर्ति प्रभावित
नोएडा सेक्टर-22 पाइपलाइन फटी |

नोएडा। सेक्टर-22 में समर विला स्कूल के पास मंगलवार को पानी की पाइपलाइन फटने से हड़कंप मच गया। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होते ही तेज दबाव के साथ पानी सड़क पर बहने लगा। कुछ ही देर में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि मौके पर झरने जैसी स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि पाइपलाइन से अब तक लाखों लीटर पानी बर्बाद हो चुका है।

पानी के तेज बहाव के चलते आसपास की सड़कों पर जलभराव हो गया, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पाइपलाइन टूटने का असर आसपास के सेक्टरों में जलापूर्ति पर भी पड़ा है। पानी की बर्बादी और लोगों की परेशानी को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची और मरम्मत का काम शुरू किया।

मेन सप्लाई बंद कर शुरू हुई मरम्मत

नोएडा प्राधिकरण के जीएम आरपी सिंह ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन लाइन फटने के कारण यह समस्या सामने आई है। क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को ठीक करने के लिए मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। पानी का बहाव रोकने और मरम्मत कार्य को पूरा करने के लिए मेन सप्लाई बंद की गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, पाइपलाइन की मरम्मत जल्द पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए करीब दो से तीन घंटे का लक्ष्य रखा गया है। मरम्मत पूरी होने के बाद पानी की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।

पुरानी पाइपलाइन को लेकर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पाइपलाइन में लीकेज हुआ है, वह काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है। लोगों का आरोप है कि इस स्थान पर पहले भी कई बार पाइपलाइन फट चुकी है। बार-बार होने वाली इस समस्या से न केवल लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है, बल्कि आसपास की सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी पैदा हो जाती है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल अस्थायी मरम्मत करने के बजाय पाइपलाइन की स्थायी मरम्मत कराई जाए या जरूरत पड़ने पर उसे बदला जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से बार-बार होने वाले लीकेज और पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा। साथ ही आसपास के सेक्टरों में जलापूर्ति भी प्रभावित नहीं होगी।


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