बॉक्सर जितेंद्र मान हत्याकांड |
ग्रेटर नोएडा। करीब आठ साल पुराने चर्चित बॉक्सर और जिम ट्रेनर जितेंद्र मान हत्याकांड में गौतमबुद्ध नगर जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी इमरान पुत्र हबीब अहमद और नफीस पुत्र सलीम खान, दोनों निवासी खुर्जा, को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
फ्लैट में मिला था जितेंद्र मान का शव
मामला ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर थाना क्षेत्र का है। प्रसिद्ध बॉक्सर और जिम ट्रेनर जितेंद्र मान एवीजे हाइट्स स्थित अपने फ्लैट में मृत मिले थे। उनके सिर में गोली लगी थी। 12 जनवरी 2018 को उनके भाई देवेंद्र मान ने सूरजपुर थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जितेंद्र मान ग्रेटर नोएडा में जिम चलाते थे। हत्या के बाद पुलिस ने जिम से जुड़े रिकॉर्ड और वहां आने-जाने वाले लोगों की जांच शुरू की। इसी दौरान सृष्टि गुप्ता का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड में उसके पति के रूप में इमरान का नाम दर्ज था। इमरान खुर्जा क्षेत्र का रहने वाला है और मीट के कारोबार से जुड़ा बताया गया।
मोबाइल बातचीत से मिली जांच को अहम कड़ी
पुलिस जांच में इमरान और सृष्टि गुप्ता के बीच संबंध होने की बात सामने आई। पुलिस ने दोनों के बीच हुई मोबाइल बातचीत और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की। पुलिस का दावा था कि इन रिकॉर्डिंग से हत्या की साजिश से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं।
जांच के दौरान इमरान के ड्राइवर नफीस की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने सृष्टि गुप्ता, इमरान और नफीस को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से .32 बोर की पिस्टल, खोखा और कारतूस, पांच मोबाइल फोन, खून के दाग वाली जींस, जितेंद्र मान के फ्लैट की चाबी, पर्स और अन्य दस्तावेज बरामद करने का दावा किया था।
कोर्ट में पेश किए गए 18 गवाह
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और रिकॉर्डिंग को भी अदालत के सामने साक्ष्य के रूप में रखा गया। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेन ड्राइव के जरिए पेश किए गए और अदालत में रिकॉर्डिंग भी सुनी गई।
अभियोजन पक्ष ने मामले में 18 गवाह पेश किए। अदालत ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद इमरान और नफीस को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सृष्टि गुप्ता का ट्रायल अभी जारी
इस मामले में आरोपी सृष्टि गुप्ता की पत्रावली अलग कर दी गई थी और उसका मुकदमा अभी विचाराधीन है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उसकी जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट से कई बार खारिज हो चुकी हैं और वह जेल में बंद है। उसके मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
हत्या की जांच के दौरान तत्कालीन एसपी ग्रामीण सुनीति सिंह ने भी पुलिस कार्रवाई की निगरानी की थी।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी (फौजदारी) ब्रह्मजीत भाटी ने पैरवी की, जबकि वादी पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. सिंह ने पक्ष रखा। करीब आ