नोएडा प्राधिकरण रिश्वत आरोप |
नोएडा। क्या सरकारी दफ्तर में काम कराने के लिए लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है? नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-96 स्थित अकाउंट डिपार्टमेंट से जुड़ा एक मामला ऐसे ही कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
यहां कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर तैनात सुरजीत सहाय पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं। कई लोगों से शिकायतें मिलने के बाद Pathak Raj News की टीम ने मामले की पड़ताल की। टीम आम ग्राहक बनकर कार्यालय पहुंची और इस दौरान सामने आई गतिविधियों का वीडियो भी टीम के पास मौजूद है।
नियुक्ति को लेकर भी सवाल
मामला केवल रिश्वत के आरोपों तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि सुरजीत सहाय की नियुक्ति एक निजी ठेकेदार के जरिए कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर हुई थी। इसके बावजूद उनके द्वारा अकाउंट डिपार्टमेंट में डिस्पैच का काम संभालने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सवाल यह है कि कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त व्यक्ति को डिस्पैच का काम किसने सौंपा? क्या इसके लिए कोई आधिकारिक जिम्मेदारी दी गई थी? क्या प्राधिकरण में नियम सभी कर्मचारियों के लिए समान हैं या कुछ लोगों को अलग तरह की छूट मिल रही है?
संजीव गुप्ता के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में फाइनेंशियल कंट्रोलर संजीव गुप्ता को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि सुरजीत सहाय को संजीव गुप्ता का समर्थन प्राप्त है।
आरोप यह भी है कि सुरजीत सहाय संजीव गुप्ता का नाम लेकर लोगों पर दबाव बनाते हैं और उन्हें धमकाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
अब प्राधिकरण से जवाब की उम्मीद
मामले में अब सवाल उठ रहा है कि शिकायतों के बावजूद सुरजीत सहाय के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? उनकी नियुक्ति और मौजूदा जिम्मेदारी को लेकर क्या नियम हैं? डिस्पैच का काम उन्हें किस आधार पर सौंपा गया?
अगर जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो सवाल सिर्फ एक कर्मचारी की भूमिका पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी उठेंगे जिसके तहत यह सब होने का आरोप लगाया जा रहा है।
अब देखना होगा कि नोएडा प्राधिकरण इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।