नोएडा सरकारी स्कूलों की बदहाली |
सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं देने के दावों के बीच नोएडा के दो सरकारी स्कूलों की पड़ताल में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। प्राथमिक विद्यालय और बहलोलपुर गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण के दौरान पाया गया की दोनों स्कूलों में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी, कम कमरे, टूटे शौचालय, गंदगी और जरूरत से ज्यादा छात्रों की संख्या जैसी समस्याएं देखने को मिलीं।
गढ़ी चौखंडी प्राथमिक विद्यालय में 304 छात्र नामांकित हैं, लेकिन स्कूल सिर्फ तीन कमरों में संचालित हो रहा है। कमरों की कमी के कारण कई बच्चों को गैलरी में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं, एक ही हॉल में बाल वाटिका-1, पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों को साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल में वेंटिलेशन की कमी के कारण कक्षाओं में उमस रहती है और बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के साथ कक्षाओं में जलभराव भी हो जाता है। स्कूल की प्रधानाचार्या शशि मिश्रा ने बताया कि नए कमरों के लिए कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। पिछले वर्ष दो कमरे स्वीकृत भी हुए थे, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ।
वहीं, बहलोलपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में 867 छात्र नामांकित हैं। स्कूल में 18 कमरे और 24 शिक्षक हैं, लेकिन छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण कई कक्षाओं में 90 से 95 छात्र एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि तय मानक के अनुसार एक कक्षा में 40 से अधिक छात्र नहीं होने चाहिए। एक कक्षा में 140 से ज्यादा छात्र नामांकित होने की भी जानकारी सामने आई है। बिजली कटौती के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उमस भरे मौसम में शिक्षकों को कई बार बाहर पढ़ाना पड़ता है।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि स्कूल परिसर में ही आंगनवाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है, जिससे बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होने के साथ बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दोनों स्कूलों में टूटे और गंदे शौचालय, परिसर में फैली गंदगी, उखड़ता छत का प्लास्टर और फर्नीचर की कमी जैसी समस्याएं भी देखने को मिलीं। बहलोलपुर स्कूल की प्रधानाचार्या नीलू खरे ने बताया कि कई शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ कार्य में लगी हुई है और सफाई कर्मचारी न होने के कारण स्कूल में नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। वहीं, चोरी के डर से कंप्यूटर लैब पर ताला लगाया गया है और फर्नीचर की कमी के चलते कई छात्रों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
स्कूलों की यह स्थिति सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है। बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण देने के लिए बुनियादी सुविधाओं में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।