नोएडा में ड्रोन से होगी नाला निगरानी |
बारिश के दौरान लगातार जलभराव की शिकायतों और तय समय सीमा के बाद भी नालों की सफाई पूरी नहीं होने पर नोएडा प्राधिकरण ने सख्त कदम उठाए हैं। अब शहर के सभी बड़े नालों की सफाई की निगरानी ड्रोन से की जाएगी। ड्रोन सर्वे और GPS लोकेशन वाली तस्वीरों के सत्यापन के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जाएगा।
प्राधिकरण ने नालों की सफाई का काम 15 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि कई जगह सफाई अधूरी मिली और बारिश के दौरान जलभराव की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद प्राधिकरण ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है।
प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने कहा कि नाला सफाई की प्रगति संतोषजनक नहीं है। इसलिए सभी वर्क सर्किलों को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी नाले की सफाई शुरू होने से पहले ड्रोन सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद सफाई के दौरान भी निगरानी होगी और काम पूरा होने पर दोबारा ड्रोन से सत्यापन किया जाएगा।
ठेकेदारों को तीन चरणों की तस्वीरें जमा करनी होंगी—पहली काम शुरू होने से पहले, दूसरी सफाई के दौरान और तीसरी काम पूरा होने के बाद। सभी तस्वीरों में GPS लोकेशन और तारीख दर्ज होना अनिवार्य होगा। सक्षम अधिकारी के सत्यापन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सितंबर से पहले किसी भी ठेकेदार का भुगतान नहीं किया जाएगा।
सभी ठेकेदारों को अपने आवंटित सभी नालों पर एक साथ पर्याप्त मशीनरी और श्रमिकों के साथ काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन ठेकेदारों ने अब तक सभी स्थानों पर काम शुरू नहीं किया है, उनसे रिपोर्ट मांगी गई है। जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
इसके अलावा, हर वर्क सर्किल के वरिष्ठ प्रबंधक रोजाना निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर प्राधिकरण को भेजेंगे। इन रिपोर्टों के आधार पर सफाई कार्य की समीक्षा होगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी।
प्राधिकरण का मानना है कि ड्रोन निगरानी, GPS आधारित फोटो और नियमित निरीक्षण से नाला सफाई में पारदर्शिता बढ़ेगी और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।