महर्षि आश्रम जमीन मामला |
नोएडा में महर्षि आश्रम की जमीन से जुड़ा मामला लगातार चर्चा में है। एक तरफ प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी इस जमीन की कथित फर्जी बिक्री और उससे जुड़े लेनदेन की जांच कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर निर्माण और प्लॉटिंग जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हाल में ईडी ने नोएडा प्राधिकरण के दो अधिकारी-कर्मचारियों समेत तीन लोगों से पूछताछ की थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, महर्षि आश्रम की करीब 3,500 बीघा जमीन पर अलग-अलग हिस्सों में फ्लैट, विला और कॉलोनियां विकसित किए जाने के आरोप हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई स्थानों पर निर्माण के लिए नोएडा प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया था। संबंधित जमीन के लैंड यूज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
26 हजार से ज्यादा निर्माण का दावा
जांच से जुड़ी रिपोर्टों में करीब 26 हजार फ्लैट और मकानों के निर्माण का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि इनमें से कई निर्माण 2019 से 2023 के बीच हुए। वहीं, कुछ जगहों पर अभी भी प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आई है।
नोएडा प्राधिकरण की ओर से कुछ निर्माणकर्ताओं को नोटिस दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, मौके पर निर्माण पूरी तरह रुकने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने पहले कहा था कि अवैध निर्माण रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है और संबंधित डेवलपर्स को नोटिस जारी किए गए हैं।
फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने का आरोप
इस पूरे मामले की शुरुआत ट्रस्ट की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेचने की शिकायत से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 3.36 हेक्टेयर जमीन से जुड़े 36 बैनामे भी ईडी की जांच के दायरे में हैं। ईडी इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इतनी बड़ी जमीन पर निर्माण और बिक्री की गतिविधियां किस तरह आगे बढ़ती रहीं और इसमें संबंधित विभागों की क्या भूमिका रही। नोएडा प्राधिकरण के दो कर्मचारियों से पूछताछ के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है। हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की आपराधिक संलिप्तता जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं कही जा सकती।
इन खसरा नंबरों पर निर्माण के आरोप
रिपोर्टों में जिन खसरा नंबरों का उल्लेख किया गया है, उनमें 700 से 715, 723-724, 728, 730 से 735, 745 से 752, 759 से 764, 779-780 और 795 से 798 शामिल हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि ईडी की जांच आगे बढ़ने के साथ क्या जमीन की खरीद-बिक्री, अवैध निर्माण और संबंधित विभागों की भूमिका की पूरी तस्वीर सामने आएगी? साथ ही, जिन निर्माणों को अवैध बताया जा रहा है, उनके खिलाफ नोएडा प्राधिकरण आगे क्या कार्रवाई करता है, इस पर भी नजर रहेगी।