महर्षि भूमि घोटाला ईडी जांच |
महर्षि भूमि घोटाला प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम ने नोएडा प्राधिकरण में तैनात दो अधिकारी-कर्मचारियों समेत तीन लोगों को पूछताछ के लिए उनके घरों से उठाया है। हालांकि, ईडी ने अभी हिरासत या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पूछताछ के लिए जिन लोगों तक टीम पहुंची, उनमें एक महाप्रबंधक का पीएस, दूसरा वर्क सर्किल-10 का सुपरवाइजर और तीसरा जमीन पर निर्माण करने वाली एजेंसियों का लाइजनर बताया जा रहा है।
आरोप है कि ये लोग 34 एजेंसियों को बेची गई 45 खसरा नंबरों की जमीन पर निर्माण कार्य में संरक्षण दिलाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर सुविधा शुल्क के तौर पर नकद रकम लेते और दिलाते थे।
जांच टीम को इन एजेंसियों से भारी मात्रा में कैश फ्लो की जानकारी मिलने के बाद रविवार को इन लोगों तक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि, ईडी ने इस कार्रवाई में हिरासत या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है।
सुपरवाइजर को उठाने पर ग्रामीणों से हुई बहस
सूत्रों के अनुसार, बिसरख थाना क्षेत्र के एक गांव से वर्क सर्किल-10 के प्राधिकरण सुपरवाइजर को उठाने का प्रयास सीआरपीएफ की टीम ने किया। इस दौरान ग्रामीणों के साथ बहस हो गई।
मामले की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और बिना सूचना आने को लेकर जांच टीम पर कड़ा एतराज जताया। हालांकि, बाद में मामला शांत हुआ और जांच टीम को वहां से जाने दिया गया।
दिल्ली के लॉकरों में कैश और दस्तावेज मिलने की बात
सूत्रों के मुताबिक, जिन जमीन खरीदने वाली एजेंसियों पर जांच एजेंसी शिकंजा कस रही थी, उनके कई प्राइवेट मल्टीपल लॉकर दिल्ली में मिले हैं। इनमें भारी मात्रा में नकदी और दस्तावेज मौजूद होने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि इन लॉकरों में सामान रखने और निकालने की प्रक्रिया बहुत तेजी से की गई थी, जिससे संबंधित लोगों के लॉकरों की पुष्टि हुई।
अब इस मामले में प्राधिकरण के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के भी जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।
कई खसरा नंबर जांच के दायरे में
सलारपुर खादर के खसरा संख्या 700 से 711, 723, 724, 728 से 735, 745 से 752, 759, 760, 762 से 764, 779, 780 और 795 से 798 समेत कई खसरे जांच के दायरे में हैं।
वहीं, भंगेल बेगमपुर के खसरा संख्या 176, 178, 217, 221, 223, 225, 226, 247, 250 और 251 को प्राधिकरण ने चिह्नित किया है। इन जमीनों पर अवैध फ्लैट बनाए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद प्राधिकरण ने निर्माण रुकवाया था।
बिना नक्शा पास हुए निर्माण, उगाही का भी आरोप
मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि जिन भवनों या भूखंडों के नक्शे प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं थे, वहां बड़े स्तर पर निर्माण और फ्लैट कैसे तैयार हो गए। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बिना मानचित्र स्वीकृत हुए निर्माण के बावजूद प्राधिकरण स्तर से प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, पूरे मामले में उगाही का आरोप भी सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति के जरिए कथित तौर पर उगाही की जा रही थी, जो प्राधिकरण से जुड़े लोगों और निर्माण कराने वालों के बीच कड़ी का काम करता था।
ईडी की पूछताछ में इसी व्यक्ति की भूमिका और पैसों के लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।