सेना ने दोगुनी की ड्रोन की मांग |
ग्रेटर नोएडा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना का भरोसा जीतने वाला टेथर्ड ड्रोन अब देश की सीमाओं की निगरानी में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में डिफेंस कॉरिडोर के स्टॉल पर प्रदर्शित इस ड्रोन की मांग भारतीय सेना की ओर से बढ़ाई गई है।
बेंगलुरु की कंपनी निंबस स्कोप के प्रतिनिधियों के मुताबिक, पहले करीब 1000 ड्रोन की मांग थी, जिसे अब बढ़ाकर 2000 कर दिया गया है। कंपनी का दावा है कि यह ड्रोन लंबे समय तक एक ही क्षेत्र पर नजर रखने में सक्षम है।
आठ घंटे तक लगातार आसमान से रख सकता है नजर
टेथर्ड मोड में यह ड्रोन एक केबल के जरिए जमीन पर मौजूद सिस्टम से जुड़ा रहता है। कंपनी के अनुसार, इस मोड में ड्रोन लगातार आठ घंटे तक उड़ान भर सकता है।
यह समुद्र तल से 5500 मीटर तक की ऊंचाई वाले इलाकों में काम कर सकता है और जमीन से करीब 110 मीटर ऊपर तक उड़ सकता है। इतना ही नहीं, 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा में भी यह स्थिर रह सकता है।
केबल हटाकर सामान्य ड्रोन की तरह इस्तेमाल करने पर यह करीब 45 मिनट तक हवा में रह सकता है।
हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाने की सुविधा
कंपनी के मुताबिक, यह एक इलेक्ट्रिक क्वाडकॉप्टर है। इसे ऊर्जा देने के लिए ग्राउंड बेस्ड सिस्टम के साथ बैटरी का भी इस्तेमाल किया गया है।
इसमें ब्रशलेस डीसी इलेक्ट्रिक मोटर लगी हैं, जिससे यह कम आवाज के साथ अधिक स्थिरता से उड़ सकता है। ड्रोन की लंबाई और चौड़ाई 1.5-1.5 मीटर, जबकि ऊंचाई 0.5 मीटर है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 15 किलोग्राम है।
ड्रोन में जरूरत के अनुसार हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और दूसरे सेंसर भी लगाए जा सकते हैं।
सीमा ही नहीं, बाढ़ और आग में भी आ सकता है काम
कंपनी प्रतिनिधियों के मुताबिक, इस ड्रोन का इस्तेमाल केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग जंगलों की निगरानी और भीड़ प्रबंधन में भी किया जा सकता है।
बाढ़ और आग जैसी आपदाओं के दौरान यह लंबे समय तक हवा में रहकर प्रभावित इलाके की निगरानी कर सकता है और कंट्रोल रूम तक रियल टाइम जानकारी पहुंचाने में मदद कर सकता है।
कंपनी प्रतिनिधियों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका सामने आने के बाद भारतीय सेना भी भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए इस तकनीक पर जोर दे रही है। कंपनी का दावा है कि लंबे समय तक लगातार निगरानी की क्षमता के कारण यह ड्रोन सीमा सुरक्षा में गेम चेंजर साबित हो सकता है।