Thursday, October 08, 2026 06:55:49 PM

सिग्नेचर पार्क एक शख्स तीन नाम
एक शख्स, 3 नाम या 3 अलग लोग? Signature Park पर 10 साल बाद फिर ‘नई एंट्री’ के दावे से उठे सवाल

एक शख्स, तीन नाम, 10 साल पुराना प्रोजेक्ट और FAR को लेकर सवाल—Signature Park की नई लॉन्चिंग पर उठे कई सवाल।

एक शख्स 3 नाम या 3 अलग लोग signature park पर 10 साल बाद फिर ‘नई एंट्री’ के दावे से उठे सवाल
सिग्नेचर पार्क एक शख्स तीन नाम |

ग्रेटर नोएडा के चाई-5 में Signature Park प्रोजेक्ट को लेकर अब कई सवाल सामने आ रहे हैं। पाटलिपुत्र बिल्डर्स, पटना से जुड़े इस प्रोजेक्ट के बारे में दावा किया जा रहा है कि यहां पिछले करीब 10 साल से काम और प्रचार की बातें होती रही हैं। लेकिन अब “Patliputra is now coming in Greater Noida” के नाम से इसे फिर नए तरीके से प्रमोट किया जा रहा है। आखिर ऐसा क्यों?

मामला सिर्फ प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। यहां एक और सवाल बेहद दिलचस्प है—एक शख्स, लेकिन तीन अलग-अलग नाम!

आरोप और सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक जगह नाम अनिल कुमार, पटना में अनिल सिंह और ग्रेटर नोएडा में अनिल सिन्हा के तौर पर सामने आने की बात कही जा रही है। अब सवाल सीधा है- क्या ये तीनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं या तीन अलग-अलग लोग हैं? इसकी आधिकारिक पुष्टि होना जरूरी है।

इसी व्यक्ति को लेकर पटना और रांची में पुराने पुलिस मामलों और धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े होने के दावे भी किए जा रहे हैं। ईडी और पीएमएलए से जुड़े मामलों में जेल जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, इन सभी दावों की पुष्टि संबंधित FIR, कोर्ट रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों से होना जरूरी है। किसी पर आरोप लगना या जांच होना अपने आप में दोष साबित नहीं करता।

अब बात करते हैं Signature Park की। दावा है कि प्रोजेक्ट पर करीब 10 साल से काम या प्रचार की बातें होती रही हैं। इसके बावजूद अब इसे “नए आगमन” के तौर पर पेश किया जा रहा है। सवाल है—अगर प्रोजेक्ट पहले से मौजूद था, तो अब नया लॉन्च क्यों?

और यहीं से आता है FAR का सवाल

FAR यानी Floor Area Ratio—यानी किसी जमीन पर नियमों के तहत कितने क्षेत्र में कितना निर्माण किया जा सकता है। आरोप है कि जिस नए प्रोडक्ट को लॉन्च करने की बात हो रही है, उसकी उपलब्धता अथॉरिटी के FAR रिकॉर्ड में साफ नहीं है।

तो सवाल है—अगर FAR में वह प्रोडक्ट उपलब्ध नहीं है, तो उसकी लॉन्चिंग और बुकिंग किस आधार पर हो रही है? क्या इसके लिए अथॉरिटी की अनुमति है? निवेशकों को कौन से दस्तावेज दिखाए जा रहे हैं?

आरोप यह भी है कि समय-समय पर इवेंट आयोजित करके निवेशकों और खरीदारों को आकर्षित किया जाता रहा है। ऐसे में यह भी साफ होना चाहिए कि इन इवेंट्स के जरिए पैसा किस आधार पर लिया गया और प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति क्या रही।

मनोज तिवारी की तस्वीर पर भी सवाल

इस पूरे मामले में सांसद मनोज तिवारी की तस्वीर प्रचार सामग्री में इस्तेमाल होने की बात भी सामने आई है।

इस पर हमने मनोज तिवारी जी के कार्यालय से बात की। कार्यालय की ओर से बताया गया कि उनका इस प्रोजेक्ट से कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक संबंध नहीं है। बताया गया कि संबंधित लोगों से पुरानी जान-पहचान है और मनोज तिवारी जी एक कलाकार के तौर पर इस तरह के प्रोजेक्ट्स और इवेंट्स में जाते रहे हैं।

यानी तस्वीर का इस्तेमाल और उसका संदर्भ भी इस मामले में एक अलग सवाल बन जाता है—क्या तस्वीर सिर्फ एक पुराने परिचय की वजह से इस्तेमाल हुई या इसके पीछे कोई और व्यावसायिक संबंध है? इस पर संबंधित पक्ष की अनुमति और स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि Signature Park कब शुरू हुआ और अब नया लॉन्च क्यों हो रहा है।

सवाल ये भी हैं—एक शख्स के तीन नाम क्यों सामने आ रहे हैं? प्रोजेक्ट की असली वैधानिक स्थिति क्या है? FAR में प्रोडक्ट की स्थिति क्या है? निवेशकों से पैसा किस आधार पर लिया जा रहा है? और प्रचार में सांसद मनोज तिवारी की तस्वीर किस अनुमति से इस्तेमाल की गई?

इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान से ही साफ होगा।


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