जलालाबाद अब परशुराम पुरी |
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 29 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक का एक प्रमुख फैसला शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर 'परशुराम पुरी' करने से जुड़ा रहा। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आने वाले जलालाबाद कस्बे का नाम बदलने की प्रक्रिया मार्च 2018 में शुरू हुई थी। नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और सितंबर 2023 की बोर्ड बैठकों में इस प्रस्ताव को पारित किया था। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपनी संस्तुति के साथ प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा। राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार के पास भेजा, जहां 20 अगस्त 2025 को इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी। अब प्रदेश कैबिनेट ने भी इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मभूमि माना जाता है। यहां भगवान परशुराम का एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है। इसी आधार पर वर्ष 2022 में प्रदेश सरकार ने इस स्थान को आधिकारिक रूप से परशुराम जन्मभूमि घोषित किया था। माना जाता है कि इस क्षेत्र और मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है।
वहीं, जलालाबाद नाम को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर के सम्मान में इस कस्बे का नाम जलालाबाद रखा गया था।
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई। अगले पांच वर्षों तक लागू रहने वाली इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना और निवेश व रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। नई नीति में हाईटेक और डीप-टेक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही स्टार्टअप को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय और संस्थागत सहयोग देने का प्रावधान किया गया है।