सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई टिप्पणी |
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में किया गया प्रदर्शन संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता।
प्रधान न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यदि कहीं पुलिस की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपों से जुड़ी याचिका पर भी अन्य लंबित मामलों के साथ सुनवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था। 28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठे, जिसके बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला।
18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने और 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए थे।
सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 36 दिनों तक चला यह आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हो गया।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह केवल दिल्ली का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश में प्रदर्शन से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की जरूरत है। अदालत ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में अनुशासन जरूरी है, लेकिन आंदोलन का मतलब यह नहीं कि हर स्थिति में लाठीचार्ज किया जाए। साथ ही, प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों सहित सभी की सुरक्षा समान रूप से महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।