Saturday, September 05, 2026 04:13:09 PM

SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का रुख
SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का रुख साफ, कहा- अभी लागू नहीं है नियम

SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है। सरकार ने कहा कि SC/ST में यह सिद्धांत लागू नहीं है और बदलाव से पहले व्यापक अध्ययन जरूरी है।

scst आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का रुख साफ कहा- अभी लागू नहीं है नियम
SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का रुख |

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। केंद्र ने कहा है कि SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत फिलहाल लागू नहीं है।

केंद्र ने इन याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि केवल आय के आधार पर SC/ST आरक्षण में बदलाव करने से पहले व्यापक समीक्षा, सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों और ठोस अध्ययन की जरूरत होगी।

सुप्रीम कोर्ट में क्यों उठी क्रीमी लेयर की मांग?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं में SC/ST समेत आरक्षित वर्गों के भीतर आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके लोगों को अलग करने की मांग की गई है। रामाशंकर प्रजापति और अन्य की याचिका में कहा गया है कि आरक्षित वर्गों के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक आरक्षण का लाभ ज्यादा समान रूप से पहुंचना चाहिए।

वहीं, अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका में विशेष रूप से SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यदि किसी SC/ST परिवार का सदस्य पहले ही संवैधानिक या वरिष्ठ सरकारी पद हासिल कर चुका है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

केंद्र ने क्यों किया विरोध?

केंद्र सरकार का कहना है कि SC/ST और OBC की सामाजिक स्थिति एक जैसी नहीं है। सरकार के अनुसार, SC समुदाय को ऐतिहासिक रूप से छुआछूत और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जबकि ST की पहचान अलग संस्कृति, भौगोलिक अलगाव और पिछड़ेपन से जुड़ी है।

केंद्र ने कहा कि OBC में लागू क्रीमी लेयर के सिद्धांत को SC/ST पर उसी तरह लागू नहीं किया जा सकता। सरकार ने अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ मामले का भी हवाला दिया है।

आय के आधार पर बदलाव से पहले अध्ययन जरूरी

केंद्र के मुताबिक आरक्षण नीति में बदलाव से पहले व्यापक समीक्षा और अनुभवजन्य अध्ययन जरूरी है। सरकार ने कहा कि SC/ST आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और असमानता को कम करना भी है।

केंद्र ने यह भी कहा कि आरक्षण नीति बनाना मुख्य रूप से कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है। अदालत सरकार को किसी खास तरीके से नीति बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।

याचिकाओं को खारिज करने की मांग

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से इन याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि याचिकाओं में संविधान के तहत किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन की बात सामने नहीं आती।

OBC में कैसे लागू है क्रीमी लेयर?

क्रीमी लेयर की व्यवस्था मुख्य रूप से OBC आरक्षण से जुड़ी है। इसके तहत सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके OBC परिवारों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाता है।

सरकार के अनुसार OBC की गैर-क्रीमी लेयर की सालाना आय सीमा 2017 में 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की गई थी। फिलहाल इसे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

50% आरक्षण की सीमा

सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंद्रा साहनी मामले में कहा था कि अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत आरक्षण सामान्य तौर पर 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। केंद्र के अनुसार SC, ST और OBC को इन्हीं प्रावधानों के तहत मिलने वाला आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है।

वहीं, EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत अलग संवैधानिक आधार पर है।


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