Saturday, July 18, 2026 02:17:08 AM

राम मंदिर चंदा विवाद स्टिंग ऑपरेशन नए सवाल
राम मंदिर चंदा विवाद: स्टिंग ऑपरेशन के दावों से उठे नए सवाल, जांच अभी जारी

राम मंदिर चंदा विवाद में स्टिंग ऑपरेशन के बाद नए दावे सामने आए हैं। दान प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं, जबकि मामले की जांच और दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

राम मंदिर चंदा विवाद स्टिंग ऑपरेशन के दावों से उठे नए सवाल जांच अभी जारी
राम मंदिर चंदा विवाद स्टिंग ऑपरेशन नए सवाल |

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदा गबन मामले के बीच एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद विवाद और गहरा गया है। टाइम्स नाउ ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में कई ऐसे दावे किए हैं, जिनसे दान लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन सभी दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही ट्रस्ट की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

गेस्ट हाउस में मिली एंट्री का दावा

टाइम्स नाउ के मुताबिक, मीडिया के लिए कई दिनों से बंद ट्रस्ट के गेस्ट हाउस में उसकी अंडरकवर टीम को तब प्रवेश मिला, जब उसने खुद को चांदी दान करने वाला बताया। स्टिंग में दावा किया गया कि टीम को बताया गया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अंदर "बाबूजी" के नाम से जाना जाता है और उनसे मुलाकात भी कराई जा सकती है।

सीसीटीवी से बचकर दान लेने का दावा

स्टिंग ऑपरेशन में खुद को चंपत राय का करीबी सहयोगी बताने वाले प्रद्युम्न नाम के व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा कि यदि कोई दानदाता सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचकर दान देना चाहता है, तो उसकी भी व्यवस्था की जा सकती है। उसने यह भी दावा किया कि उस समय चंपत राय गेस्ट हाउस में मौजूद थे और लगातार बैठकों में व्यस्त थे। हालांकि, चंदा गबन का मामला सामने आने के बाद से चंपत राय सार्वजनिक रूप से कम ही नजर आए हैं।

हलफनामा लिया, लेकिन खरीद बिल नहीं मांगा गया

स्टिंग के अनुसार, दान स्वीकार करने से पहले दानदाता से एक हलफनामा तैयार कराने की बात कही गई, जिसमें यह घोषित करना था कि दान किए गए सोने या चांदी पर भविष्य में उसका कोई अधिकार नहीं रहेगा और ट्रस्ट उसका किसी भी तरह उपयोग कर सकेगा।

चैनल का दावा है कि इस दौरान सोना और चांदी का मूल खरीद बिल नहीं मांगा गया। इतना ही नहीं, बिना बिल के सोना स्वीकार करने और यहां तक कि नकली आभूषण भी लेने की कथित सहमति जताई गई। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो दान स्वीकार करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

चंपत राय की भूमिका पर भी सवाल

स्टिंग में कई बार यह दावा किया गया कि दान सीधे चंपत राय तक पहुंचाया जाएगा और पूरी प्रक्रिया उनकी देखरेख में होगी। हालांकि, इन दावों पर अब तक चंपत राय या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

एक करोड़ से अधिक की नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद

इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच में अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, अमेरिकी डॉलर और सोने के आभूषण बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से 20.39 लाख रुपये, 1,121 अमेरिकी डॉलर और सोने के आभूषण मिले हैं। वहीं करुणेश पांडे से 18.07 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख रुपये, रमाशंकर मिश्र से 7.32 लाख रुपये और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू से एक लाख रुपये नकद बरामद किए जाने का दावा किया गया है।

जांच में उठे नए सवाल

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या गिरफ्तार किए गए आरोपी ही इस धन के अंतिम लाभार्थी थे या वे किसी अन्य व्यक्ति के लिए नकदी और कीमती सामान की देखरेख कर रहे थे। हालांकि, जांच एजेंसियों ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।

एसआईटी जांच में एक योग प्रशिक्षक का भी उल्लेख होने की बात कही गई है, लेकिन फिलहाल उसकी कथित संलिप्तता के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है।

एसआईटी की जांच जारी

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। इसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और दान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने अदालत की अनुमति से आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ की। साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का भी बयान दर्ज किया गया। विवाद बढ़ने के बाद चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया है, हालांकि ट्रस्ट ने अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। वहीं स्टिंग ऑपरेशन में किए गए दावों की भी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।


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