Saturday, September 05, 2026 02:18:16 AM

सज्जन कुमार का निधन 1984 दंगा केस
पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन, 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़ा रहा लंबा कानूनी सफर

पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। वह 1984 सिख विरोधी दंगों के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़ा रहा लंबा कानूनी सफर
सज्जन कुमार का निधन 1984 दंगा केस |

पूर्व कांग्रेस सांसद और नेता सज्जन कुमार का 80 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। अस्पताल ने अभी उनकी मौत की वजह स्पष्ट नहीं की है।

सज्जन कुमार करीब दिसंबर 2018 से तिहाड़ जेल में बंद थे। 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में उन्हें दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा मिली थी। फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़े मामले में दूसरी बार उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

कौन थे सज्जन कुमार?

सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह बेकरी चलाते थे। उन्हें कांग्रेस के दिवंगत नेता संजय गांधी का करीबी माना जाता था।

उन्होंने 1977 में दिल्ली नगर निगम के पार्षद के तौर पर राजनीति शुरू की। इसके बाद वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने। 1980 में वह बाहरी दिल्ली से पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए। बाद में 1991 और 2004 में भी उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता।

1984 के सिख विरोधी दंगे क्या थे?

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़क गई।

इससे कुछ महीने पहले जून 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया था। इस सैन्य कार्रवाई में जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके कई साथी मारे गए थे। इस कार्रवाई से सिख समुदाय के एक बड़े हिस्से में गहरी नाराजगी पैदा हुई थी।

1984 की हिंसा में हजारों लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल थी।

सज्जन कुमार पर क्या आरोप लगे थे?

1984 की हिंसा के दौरान दिल्ली के सुल्तानपुरी, दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी जैसे इलाकों में सज्जन कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

गवाहों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने भीड़ को भड़काया और सिखों के घरों तथा दुकानों की पहचान कराकर उन पर हमले करवाए गए। कुछ मामलों में यह भी आरोप लगाया गया कि भीड़ ने सिखों को उनके घरों से निकालकर हत्या की और संपत्तियों में आगजनी की।

हालांकि, इन मामलों में अलग-अलग स्तर पर आरोप, गवाही और अदालतों के फैसले रहे हैं, इसलिए हर आरोप को अदालत द्वारा साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

कैसे हुई कानूनी कार्रवाई?

सज्जन कुमार के खिलाफ मामलों में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही। 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली कैंट इलाके में पांच सिखों की हत्या से जुड़े मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

इसके बाद फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़े मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।

वहीं, जनवरी 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने जनकपुरी और विकासपुरी से जुड़े एक अन्य 1984 हिंसा मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था।

इस तरह 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चलती रही और अलग-अलग मामलों में अदालतों के अलग-अलग फैसले भी आए।


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