ऑफशोर फंड को टैक्स में राहत |
केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक फंड मैनेजमेंट और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आयकर अधिनियम के तहत ऑफशोर फंडों को मिलने वाली कर छूट (टैक्स बेनिफिट) की शर्तों को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे भारत से संचालित होने वाले ऑफशोर फंडों को प्रोत्साहन मिलेगा और निवेशकों के लिए कर व्यवस्था अधिक स्पष्ट एवं सरल होगी।
सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी पांच वर्ष की कर छूट को 10 वर्ष और बढ़ाकर 2040-41 तक लागू किया जाए। इसके तहत भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए पूंजीगत सामान, उपकरण और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियां भी इस कर राहत का लाभ उठा सकेंगी।
इसके अलावा, सरकार ने 31 मार्च 2031 तक 15 वर्ष के नए टैक्स हॉलीडे का प्रस्ताव भी रखा है। यह कर छूट अधिसूचित विशेष क्षेत्रों (Notified Special Zones) में कच्चे हीरों (रफ डायमंड) की बिक्री से होने वाली आय पर लागू होगी। इसका लाभ खनन कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकर, एग्रीगेटर और टेंडर या नीलामी संचालित करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलेगा।
ये सभी प्रावधान टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) विधेयक, 2026 का हिस्सा हैं। विधेयक अभी संसद में पेश नहीं किया गया है, लेकिन इसकी प्रति सांसदों को वितरित की जा चुकी है और इसे इसी सप्ताह संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
ऑफशोर फंडों के लिए आसान होंगी शर्तें
सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि ऑफशोर फंडों की गतिविधियों को भारत में बिजनेस इनकम नहीं माना जाएगा। इसके लिए मौजूदा 13 पात्रता शर्तों में से 8 शर्तें हटाने का प्रस्ताव है।
यदि संशोधन लागू होते हैं तो ऑफशोर फंडों को अब कर छूट पाने के लिए:
- कम से कम 25 निवेशकों की अनिवार्यता नहीं होगी।
- किसी एक निवेशक की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी की सीमा समाप्त होगी।
- किसी एक इकाई में 25 प्रतिशत से अधिक निवेश की रोक हटेगी।
- संबद्ध संस्थाओं में निवेश संबंधी प्रतिबंध समाप्त होगा।
- हर महीने औसतन 100 करोड़ रुपये के न्यूनतम कॉर्पस की शर्त भी नहीं रहेगी।
हालांकि, टैक्स छूट पाने के लिए अब भी कुछ आवश्यक शर्तें लागू रहेंगी। इनमें प्रमुख रूप से यह शामिल है कि फंड भारत का कर निवासी (Resident) नहीं होना चाहिए और वह भारत में किसी कारोबार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण या प्रबंधन नहीं करेगा। साथ ही भारतीय निवेशकों का कुल प्रत्यक्ष निवेश फंड के कुल कॉर्पस का 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक कदम
कर विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से भारत का फंड मैनेजमेंट इकोसिस्टम वैश्विक मानकों के अनुरूप होगा।
EY India में पार्टनर और फाइनेंशियल सर्विसेज टैक्स लीडर तेजस देसाई ने कहा कि कई ऐसी ‘सेफ हार्बर’ शर्तों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है जो वैश्विक फंड संरचनाओं के अनुरूप नहीं थीं। उनके अनुसार, इससे फंड मैनेजरों को अधिक लचीलापन मिलेगा और भारत वैश्विक निवेश रणनीतियों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी केंद्र बन सकेगा।
वहीं Nangia Global के पार्टनर अभीत सचदेवा ने कहा कि इन बदलावों से भारत का ऑनशोर फंड मैनेजमेंट इकोसिस्टम अधिक आकर्षक बनेगा और ऑफशोर फंडों की प्रबंधन गतिविधियों को भारत में स्थानांतरित करने को बढ़ावा मिलेगा।
एफपीआई और डेटा सेंटर को भी राहत
विधेयक में 5 जून 2026 को जारी अध्यादेश को भी कानून का रूप देने का प्रस्ताव है। इसके तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट देने का प्रावधान शामिल है।
इसके अलावा, डेटा सेंटर सेक्टर के लिए भी कर राहत का प्रस्ताव किया गया है। पात्र डेटा सेंटर की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर स्वामित्व और लीज दोनों मॉडल पर संचालित केंद्रों को शामिल किया जाएगा। साथ ही भारत के अधिसूचित डेटा सेंटरों से सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए अलग से सरकारी अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
AKM Global के मैनेजिंग पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा कि इन बदलावों से कर छूट से जुड़ी पात्रता शर्तें सरल होंगी, कारोबार करना आसान होगा और भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश को नया प्रोत्साहन मिलेगा।