स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को सक्रिय रूप से तैनात किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत तक भारत के पास कुल 190 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 178 हथियार सैन्य भंडार (स्टोरेज) में रखे गए हैं, जबकि 12 परमाणु हथियार तैनात स्थिति में हैं। पिछले वर्ष भारत के पास 180 परमाणु हथियार थे और सभी भंडारण में रखे गए थे।
हालांकि, SIPRI की इस रिपोर्ट पर भारत के रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पहली बार तैनात हुए 12 परमाणु हथियार
8 जून को जारी SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने 12 परमाणु हथियारों को तैनात किया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन हथियारों को कहां तैनात किया गया है, लेकिन रक्षा मामलों के जानकार और पत्रकार राहुल बेदी का अनुमान है कि इन्हें भारत की दो परमाणु पनडुब्बियों पर तैनात किया गया हो सकता है, जो समुद्र में लंबी अवधि तक गश्त करने में सक्षम हैं।
हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राहुल बेदी के अनुसार, भारत लंबे समय से "पहले परमाणु हमला नहीं" (No First Use) की नीति का पालन करता है। इस नीति के तहत आमतौर पर परमाणु हथियारों के वॉरहेड और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलों को अलग-अलग रखा जाता है। किसी आपात स्थिति में ही दोनों को एक साथ जोड़ा जाता है। ऐसे में शांतिकाल में परमाणु हथियारों की तैनाती को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
परमाणु प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की परमाणु रणनीति तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है- वायु आधारित, भूमि आधारित और समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोध क्षमता।
इनमें समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को सबसे सुरक्षित माना जाता है क्योंकि समुद्र में मौजूद परमाणु पनडुब्बियों का पता लगाना बेहद कठिन होता है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े परमाणु देशों की तरह भारत भी अब समुद्री गश्त के दौरान परमाणु हथियारों की तैनाती की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
राहुल बेदी का कहना है कि दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्तियां अपनी परमाणु पनडुब्बियों को पूरी तरह हथियारों से लैस रखकर गश्त कराती हैं। भारत का यह कदम भी उसी रणनीति की ओर बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
पाकिस्तान ने नहीं बढ़ाए अपने परमाणु हथियार
SIPRI रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पास फिलहाल 170 परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 और 2026 के दौरान पाकिस्तान ने कोई परमाणु हथियार तैनात नहीं किया है और न ही उसकी कुल संख्या में कोई वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि दक्षिण एशिया में सामरिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देशों की परमाणु रणनीतियों में अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं।
परमाणु हथियारों के लिए प्लूटोनियम पर बढ़ा जोर
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत केवल परमाणु हथियारों की संख्या ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि उनके लिए आवश्यक विस्फोटक ईंधन (फिसाइल मैटेरियल) का उत्पादन भी तेजी से कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत परमाणु हथियारों के लिए यूरेनियम संवर्धन की तुलना में प्लूटोनियम का अधिक उपयोग कर रहा है। इसी तरह की रणनीति इजराइल भी अपनाता है। वहीं पाकिस्तान, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश यूरेनियम और प्लूटोनियम दोनों का इस्तेमाल करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास दोनों प्रकार के ईंधन उत्पादन की क्षमता मौजूद है और यह रणनीति उपलब्ध संसाधनों तथा तकनीकी जरूरतों पर आधारित हो सकती है।
चीन तक पहुंचने वाली क्षमता वाले हथियारों पर फोकस
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब ऐसे लंबी दूरी के हथियार विकसित करने पर केंद्रित है, जो चीन के पूरे क्षेत्र तक पहुंचने में सक्षम हों।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई नया कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से भारत अपनी रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। चीन के साथ सीमा तनाव के बाद इस प्रक्रिया में और तेजी आई है।
SIPRI ने यह भी कहा है कि भारत अपने हथियारों की डिलीवरी प्रणाली को तेजी से आधुनिक बना रहा है, जबकि चीन, पाकिस्तान, अमेरिका और रूस भी अपने परमाणु और सैन्य ढांचे को लगातार उन्नत कर रहे हैं।
रक्षा खर्च और हथियार खरीद में भारत की बढ़ती भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 में रक्षा क्षेत्र पर 92.1 अरब डॉलर खर्च किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा बजट वाला देश बन गया है।
हथियारों की खरीद के मामले में भी भारत की भूमिका काफी बड़ी रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच वैश्विक रक्षा आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही, जिससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आयातक देश बन गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन, सऊदी अरब और कतर ने भी इस अवधि में बड़े पैमाने पर रक्षा खरीद की है। इन देशों ने मिलकर दुनिया की कुल रक्षा खरीद का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा लिया।
दुनिया में 12 हजार से अधिक परमाणु हथियार
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत तक दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों—अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल के पास कुल लगभग 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं।
इनमें से करीब 4,012 परमाणु हथियार सैन्य बलों के साथ तैनात हैं, जबकि लगभग 9,745 हथियार सैन्य भंडार में रखे गए हैं और जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सकता है।
रिपोर्ट बताती है कि तैनात हथियारों में से लगभग 2,100 से 2,200 परमाणु वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों पर उच्च सतर्कता (हाई अलर्ट) की स्थिति में रखे गए हैं।
परमाणु हथियारों की दौड़ को लेकर बढ़ी चिंता
SIPRI का कहना है कि दुनिया एक नए परमाणु प्रतिस्पर्धा के दौर की ओर बढ़ रही है। हालांकि कुल परमाणु हथियारों की संख्या पहले की तुलना में कम दिखाई देती है, लेकिन इसका मुख्य कारण अमेरिका और रूस द्वारा पुराने हथियारों को नष्ट किया जाना है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में नए परमाणु हथियारों के निर्माण की गति पुराने हथियारों के नष्ट होने की गति से आगे निकल सकती है। साथ ही विभिन्न देशों द्वारा परमाणु कार्यक्रमों को लेकर बढ़ती गोपनीयता के कारण वैश्विक पारदर्शिता भी कम होती जा रही है।
SIPRI के अनुसार, वर्तमान में अमेरिका और रूस दुनिया के लगभग 86 प्रतिशत परमाणु हथियारों के मालिक हैं। वहीं चीन के परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर 620 हो गई है, जो वैश्विक रणनीतिक संतुलन में तेजी से बदलाव का संकेत माना जा रहा है।