Saturday, September 05, 2026 01:35:49 AM

भारत ने UNSC सुधार और विस्तार की मांग उठाई
भारत ने फिर उठाई UNSC में सुधार और विस्तार की मांग

भारत ने UNSC में सुधार और विस्तार की मांग दोहराई। भारत ने स्थायी-अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने, ग्लोबल साउथ की भागीदारी और आतंकी लिस्टिंग में पारदर्शिता पर जोर दिया।

भारत ने फिर उठाई unsc में सुधार और विस्तार की मांग
भारत ने UNSC सुधार और विस्तार की मांग उठाई |

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार और इसके विस्तार की मांग एक बार फिर मजबूती से उठाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने कहा कि 1945 में बनाई गई सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना आज की दुनिया की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाती।

भारत ने सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग की है। साथ ही भारत ने ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की अधिक भागीदारी पर जोर दिया है।

भारत ने परिषद के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और अस्थायी सदस्यों को जरूरी दस्तावेजों तक बेहतर पहुंच देने की भी मांग की है।

80 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव की जरूरत

संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल किसी देश के संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों के निष्पक्ष मूल्यांकन की प्रक्रिया में राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए।

भारत का कहना है कि करीब 80 साल पुरानी सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में बदलाव किए बिना आज और आने वाले समय की वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटना मुश्किल होगा।

भारत के मुताबिक सुरक्षा परिषद में सुधार अब सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि समय की मांग बन चुका है। परिषद को दुनिया में बदलती ताकत और संयुक्त राष्ट्र की बढ़ती सदस्यता के हिसाब से अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

आतंकी लिस्टिंग में राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल

योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद में किसी देश की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को प्रतिबंधित सूची से हटाकर उन्हें वैध बनाने या बिना ठोस आधार और सबूत के राजनीतिक कारणों से किसी संस्था को आतंकवादी संगठन घोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के तहत व्यक्तियों और संगठनों को आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर भी चिंता जताई है।

भारत के अनुसार, मंजूर की गई आतंकवादी सूची सार्वजनिक की जाती है, लेकिन किसी प्रस्ताव को खारिज करने या उसे तकनीकी रूप से रोकने यानी टेक्निकल होल्ड पर रखने के कारण आमतौर पर सार्वजनिक नहीं किए जाते।

भारत पहले भी इस प्रक्रिया को ‘छिपा हुआ वीटो’ बता चुका है। खासतौर पर UNSC की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के कामकाज के संदर्भ में भारत ने यह मुद्दा उठाया है।

नई दिल्ली को संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को आतंकवादी सूची में शामिल कराने की कोशिशों में भी विरोध का सामना करना पड़ा है। UNSC के स्थायी सदस्य चीन ने पहले भारत के समर्थन वाले कुछ प्रस्तावों को रोकने या उन पर टेक्निकल होल्ड लगाने का काम किया है।


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