Saturday, September 05, 2026 02:24:15 AM

चीनी की कीमतों पर ISMA का बड़ा दावा
चीनी की कीमतों पर बड़ी खबर: ISMA बोला- देश में कोई कमी नहीं, जल्द घट सकते हैं दाम

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ISMA ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। त्योहारों की मांग के लिए पर्याप्त स्टॉक है और आने वाले समय में कीमतें कम होने की उम्मीद है।

चीनी की कीमतों पर बड़ी खबर isma बोला- देश में कोई कमी नहीं जल्द घट सकते हैं दाम
चीनी की कीमतों पर ISMA का बड़ा दावा |

भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन यानी ISMA ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। संगठन को उम्मीद है कि आने वाले समय में चीनी की कीमतों में कमी आ सकती है।

ISMA के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, हाल में चीनी की कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह कुछ लोगों द्वारा कीमत बढ़ने की उम्मीद में स्टॉक जमा करना और मौसम से जुड़ी समस्याओं के कारण उत्पादन में कमी है।

उन्होंने कहा कि देश में त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और सप्लाई की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

हालांकि, पिछले एक महीने में चीनी की रिटेल और होलसेल कीमतों में करीब 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कीमतें बढ़कर 56 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी।

वहीं, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज यानी NFCSF ने भी कहा है कि देश में चीनी की सप्लाई पर्याप्त है। फेडरेशन ने 2025-26 सीजन के लिए 279 लाख टन नेट चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है। इसमें इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई अनुमानित 24 लाख टन चीनी शामिल नहीं है।

2026-27 सीजन के लिए फेडरेशन ने 35 लाख टन शुरुआती स्टॉक का अनुमान लगाया है। घरेलू मांग करीब 22 लाख टन प्रति माह रहने का अनुमान है। फेडरेशन का कहना है कि नवंबर तक 15 से 20 लाख टन स्टॉक बच सकता है, जिसके बाद नई पेराई से सप्लाई आने लगेगी।

फेडरेशन के प्रेसिडेंट प्रकाश नाइकनवारे ने कहा कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि कुछ आयातित चीनी की खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती है।

फिलहाल आयात के लिए ब्राजील सबसे व्यावहारिक स्रोत बताया जा रहा है। ब्राजील से भारत के बंदरगाहों तक चीनी पहुंचने में आमतौर पर 40 से 45 दिन लगते हैं। हालांकि, DGFT की मंजूरी, लेटर ऑफ क्रेडिट, शिपमेंट की तारीख और ब्राजील के बंदरगाहों पर भीड़ जैसे कारणों से समय बदल सकता है।

वहीं, नाइकनवारे ने संकेत दिया कि सरकार 31 अक्टूबर की समय-सीमा को बहुत सख्त नियम नहीं मानेगी और रास्ते में मौजूद शिपमेंट पर भी विचार किया जा सकता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे बंदरगाह वाले राज्यों में आयातित चीनी जल्दी पहुंच सकती है। इसके बाद इसे सड़क और रेल के जरिए दूसरे राज्यों तक भेजा जा सकता है।

इसके अलावा, भारत को 20 लाख टन के मंजूर निर्यात कोटे में से अब तक सिर्फ 8 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अंतर की वजह से निर्यात प्रभावित हुआ है।

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है।


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