Saturday, October 10, 2026 10:42:38 PM

ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम
CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन

मतदाता सूची और SIR को लेकर CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफा मांगा है। इस्तीफा नहीं देने पर देशव्यापी आंदोलन और दिल्ली में प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।

cec ज्ञानेश कुमार को cjp का 48 घंटे का अल्टीमेटम इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन
ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम |

नई दिल्ली। मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि इस्तीफा नहीं होने पर पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और इसके बाद दिल्ली में भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की जांच की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।

ज्ञानेश कुमार पर CJP के गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं का केंद्रीयकरण किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, ये CJP की ओर से लगाए गए आरोप हैं और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इन आरोपों को लेकर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

48 घंटे में इस्तीफा नहीं तो आंदोलन

अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। पार्टी ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।

CJP ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए हैं और पुराने मतदाता रोल को बहाल करने जैसी मांगें सामने रखी हैं।

13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल से हटे

यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब The Indian Express की जांच के मुताबिक SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटे हैं।

CJP ने भी इस आंकड़े का हवाला देते हुए मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियों की रिपोर्ट

The Indian Express की 23 सितंबर की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट के मुताबिक ये आपत्तियां नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम और उसके केंद्रीयकरण जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला

गोवा से जुड़ा मामला भी इस विवाद के केंद्र में है। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय Electoral Registration Officers ने दस्तावेजों की जांच के बाद 97 मतदाताओं को पात्र पाया था, लेकिन सॉफ्टवेयर में जरूरी विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

रिपोर्ट के अनुसार, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सात दिनों में आठ बार संबंधित अधिकारियों को ई-मेल भेजकर जरूरी तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

CJP ने उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल

CJP के सह-संयोजक आशुतोष रंका ने 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और विपक्षी दलों के प्रदर्शन को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर आरोप लगाए।

हालांकि, CJP की ओर से लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें पार्टी के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

फिलहाल CJP ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों और मांगों पर क्या जवाब देता है और CJP अपने घोषित आंदोलन को आगे किस तरह ले जाती है।


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