Sunday, August 16, 2026 10:30:12 AM

राज्यसभा में आज एंटी-पेपर लीक बिल
एंटी-पेपर लीक बिल आज राज्यसभा में, सरकार के पास बहुमत; सख्त कानून बनने की राह आसान

लोकसभा से पास एंटी-पेपर लीक बिल आज राज्यसभा में पेश होगा। सरकार के बहुमत के चलते इसके आसानी से पारित होने की संभावना है।

एंटी-पेपर लीक बिल आज राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत सख्त कानून बनने की राह आसान
राज्यसभा में आज एंटी-पेपर लीक बिल |

लोकसभा में हंगामे के बीच पारित होने के बाद अब एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 आज यानी 30 जुलाई को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। उच्च सदन में इस विधेयक पर चर्चा होगी और देशभर की निगाहें इस पर टिकी हैं। लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों और छात्रों के विरोध के बाद केंद्र सरकार यह संशोधन लेकर आई है।

बुधवार (29 जुलाई) को लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार को घेरा। इस दौरान उनकी केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से तीखी बहस भी हुई। सदन में बढ़ते हंगामे के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार ने यह विधेयक लोकसभा से पारित करा लिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह विधेयक राज्यसभा से भी आसानी से पास हो जाएगा। राज्यसभा में किसी भी सामान्य विधेयक को पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत जरूरी होता है। राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 245 है, जबकि फिलहाल सदन में 242 सदस्य हैं। ऐसे में इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को 123 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

मौजूदा संख्या बल के अनुसार राज्यसभा में एनडीए के पास करीब 152 सांसदों का समर्थन है, जो आवश्यक बहुमत से काफी अधिक है। इसी वजह से माना जा रहा है कि सरकार इस विधेयक को उच्च सदन से भी आसानी से पारित करा सकती है।

इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाना है। सरकार का कहना है कि इससे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा। साथ ही संगठित गिरोहों, संस्थानों और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी मजबूत होगा।

एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 की प्रमुख बातें

केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में लागू कानून को और अधिक सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा संसद में पेश किए गए इस संशोधन विधेयक में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं।

  • यदि कोई संगठित गिरोह, संस्था, अधिकारी या अन्य व्यक्ति सुनियोजित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर का दोषी पाया जाता है, तो उसे अब अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। पहले यह अधिकतम सजा 5 साल थी।
  • पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर, एजेंसियों और संस्थानों पर दोष साबित होने पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
  • मामलों के तेजी से निपटारे के लिए हर राज्य में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए प्रस्ताव है कि राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों के लागू होने से सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगेगी और दोषियों के खिलाफ पहले से अधिक सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।


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