गोविंदा-सुनीता विवाद पर शशि सिन्हा की सलाह |
अभिनेता गोविंदा और सुनीता आहूजा के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद को लेकर अब अभिनेता शशि सिन्हा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सुनीता के तलाक की याचिका वापस लेने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि परिवार की निजी बातें इस तरह सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए थीं।
‘घर की बात घर में सुलझानी चाहिए’
शशि सिन्हा ने कहा कि सुनीता का याचिका वापस लेना अच्छी बात है, लेकिन परिवार के विवाद को पहले ही आपस में बैठकर सुलझाना चाहिए था।
उनके मुताबिक घर में मतभेद या झगड़ा हो सकता है, लेकिन उसे सार्वजनिक तमाशा नहीं बनाना चाहिए। परिवार से जुड़ा कोई फैसला हो तो उसे मिल-बैठकर सुलझाना बेहतर है।
2-3 साल से चल रहा था विवाद
शशि सिन्हा ने बताया कि गोविंदा और सुनीता के बीच विवाद कोई नई बात नहीं थी। उनके अनुसार यह करीब 2-3 साल से चल रहा था और तलाक की याचिका लगभग 2 साल पहले दाखिल की गई थी।
उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से चले आ रहे मतभेद को सार्वजनिक करने के बजाय दोनों को आपस में बातचीत करके समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए थी।
‘लगा कि इस बात को सपोर्ट नहीं मिल रहा’
सुनीता ने तलाक की याचिका वापस क्यों ली, इस पर शशि सिन्हा ने कहा कि शायद उन्हें लगा कि इस मामले को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा था।
उनके मुताबिक जनता, मीडिया और दर्शकों की तरफ से भी वैसा समर्थन नहीं मिला, जिसकी उम्मीद थी। इसलिए अदालत के फैसले का इंतजार करने के बजाय उन्होंने मामले को खत्म करना बेहतर समझा।
विवाद के बावजूद परिवार की मदद कर रहे हैं गोविंदा
शशि सिन्हा ने यह भी दावा किया कि विवाद के बावजूद गोविंदा ने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना जारी रखा।
उनके अनुसार गोविंदा आज भी सुनीता की आर्थिक मदद करते हैं और जरूरत पड़ने पर परिवार के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने परिवार से अपना मुंह नहीं मोड़ा है।
‘गोविंदा ने काफी कुछ सहा’
गोविंदा के रवैये पर शशि सिन्हा ने कहा कि अभिनेता ने इस पूरे विवाद में काफी कुछ सहा है। उन्होंने जब भी इस मामले पर बात की, अपनी सीमा में रहकर ही प्रतिक्रिया दी।
वहीं, सुनीता की याचिका वापस लेने पर गोविंदा की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब आगे क्या?
शशि सिन्हा को उम्मीद है कि अब परिवार की बातें दोबारा सार्वजनिक नहीं होंगी। उनका कहना है कि परिवार में कोई विवाद हो तो बातचीत से समाधान निकालना चाहिए और फैसले घर में बैठकर लेने चाहिए।
उनके मुताबिक परिवार की निजी बातों को बार-बार बाहर लाकर तमाशा बनाने से बचना चाहिए।