सीबीएसई बोर्ड परीक्षा रजिस्ट्रेशन सैंपल पेपर देरी |
हर साल लाखों छात्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी आमतौर पर जुलाई-अगस्त से शुरू हो जाती है। इसी दौरान छात्रों के रजिस्ट्रेशन समेत कई जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।
लेकिन इस बार सीबीएसई प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है और इसका असर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों पर भी दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ी चिंता 10वीं और 12वीं के छात्रों के रजिस्ट्रेशन को लेकर है। आमतौर पर अगस्त तक पूरी होने वाली रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सितंबर शुरू होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। इससे स्कूल प्रशासन के साथ छात्र और अभिभावक भी असमंजस में हैं।
सैंपल पेपर भी जारी नहीं
सीबीएसई की ओर से हर साल अगस्त या सितंबर में सैंपल पेपर जारी कर दिए जाते हैं। इससे छात्रों को बोर्ड परीक्षा के पैटर्न को समझने और तैयारी करने में मदद मिलती है। लेकिन इस बार अभी तक सैंपल पेपर जारी नहीं हुए हैं। इससे छात्रों की तैयारी प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, करीब चार महीने बाद बोर्ड परीक्षा की डेटशीट जारी की जानी होती है, ऐसे में इसमें भी देरी की चिंता बढ़ गई है।
आगे बढ़ सकती हैं परेशानियां
रजिस्ट्रेशन में देरी का असर आगे रोल नंबर जारी करने, परीक्षा केंद्र तय करने, एडमिट कार्ड बांटने और बोर्ड परीक्षा की डेटशीट पर पड़ सकता है। इसके अलावा बोर्ड की छात्रवृत्ति योजनाओं और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
रजिस्ट्रेशन में देरी से स्कूल प्रधानाचार्य, छात्र और अभिभावक चिंतित हैं। समय कम मिलने से छात्रों को रजिस्ट्रेशन में हुई गलतियों को सुधारने का पर्याप्त मौका भी नहीं मिल सकता।
OSM विवाद के बाद प्रशासनिक संकट
सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग में गंभीर खामियां सामने आने के बाद पूर्व चेयरमैन राहुल सिंह का तबादला कर दिया गया था। इसके बाद जुलाई में लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
हालांकि, एक ही महीने में लोखंडे प्रशांत सीताराम को दोहरी जिम्मेदारी दे दी गई। सीबीएसई अध्यक्ष का पद उन्हें अतिरिक्त प्रभार के तौर पर मिला, जबकि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव का अहम पद संभाल रहे हैं। इसी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बोर्ड के कामकाज और परीक्षा तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।