स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा: मेडिकल स्टोर और क्लीनिकों में खुलेआम हो रहा अवैध गर्भपात का कारोबार
वाराणसी में गर्भपात की दवा के सेवन से एक युवती की मौत के बाद जिले में अवैध गर्भपात के कारोबार की पड़ताल के लिए शुक्रवार से रविवार तक स्टिंग ऑपरेशन किया गया। जांच के दौरान कोपागंज, अमिला, मादी सिपाह, थानीदास और पुराघाट क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर और निजी क्लीनिकों की आड़ में गर्भपात का धंधा संचालित होने के दावे सामने आए।
स्टिंग के दौरान अमिला क्षेत्र के थानीदास स्थित आनंद मेडिकल स्टोर से जुड़े एक क्लीनिक की संचालक किरन ने बिना डॉक्टर के पर्चे, जांच रिपोर्ट या अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखे गर्भपात की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि कम अवधि के गर्भ में दवाओं के जरिए गर्भपात कराया जा सकता है और इसके लिए दवा लेने का तरीका भी बताया।
पांच क्लीनिकों में गर्भपात कराने का दावा
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक डमी महिला मरीज की रिपोर्ट पांच अस्पतालों और क्लीनिकों में दिखाई गई। जांच में सामने आया कि विभिन्न संचालकों ने दो हजार से लेकर सात से नौ हजार रुपये तक में गर्भपात कराने की बात कही। साथ ही भरोसा दिलाया गया कि प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
जांच में यह भी पाया गया कि कई मेडिकल स्टोरों पर गर्भपात की दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे और जरूरी मेडिकल जांच के उपलब्ध कराई जा रही थीं। यह पूरा कारोबार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के आसपास संचालित होने का दावा किया गया।
नवजात की खरीद-फरोख्त का भी दावा
कोपागंज स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में स्टिंग टीम ने खुद को एक गर्भवती युवती का परिचित बताकर जानकारी ली। यहां खुद को डॉक्टर बताने वाली मीना ने क्लीनिक में गर्भपात कराने की बात कही।
इसी दौरान वहां मौजूद एक महिला ने नवजात बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति को देने और उसके बदले पैसे मिलने की बात कही। अगले दिन टीम दोबारा अस्पताल पहुंची, जहां कृष्णा कुमार नामक व्यक्ति ने खुद को ग्राम प्रधान बताते हुए कहा कि गर्भपात पर करीब पांच हजार रुपये खर्च होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि गर्भ सात महीने का हो तो जन्म के बाद बच्चे को किसी दंपती को सौंपा जा सकता है और इसके बदले अच्छी रकम मिल सकती है।
15 साल की किशोरी का गर्भपात कराने का दावा
अमिला के थानीदास क्षेत्र स्थित आनंद पैथोलॉजी के पास मौजूद जनसेवा क्लीनिक में टीम पहुंची। यहां खुद को डॉक्टर बताने वाली किरन ने रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि पहले दवा दी जाएगी, जिससे ब्लीडिंग शुरू होगी। इसके बाद मरीज को कुछ घंटों तक भर्ती रखकर छुट्टी दे दी जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि पहले भी 15 वर्ष की एक किशोरी का गर्भपात कराया जा चुका है। किरन ने पूरी प्रक्रिया का खर्च करीब नौ हजार रुपये बताया, जिसमें दवाएं और 15 दिन तक फॉलोअप शामिल होने की बात कही।
दूसरे अस्पताल में भी गर्भपात की पेशकश
अमिला कस्बे के प्रतिमा सेवा सदन, जिसका पंजीकरण आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के तहत बताया गया, वहां भी टीम पहुंची। कर्मचारियों ने बताया कि पहले दवाएं दी जाएंगी, जिससे ब्लीडिंग शुरू होगी। इसके बाद मरीज को एक-दो दिन अस्पताल में रखा जाएगा। इस प्रक्रिया का खर्च लगभग 10 हजार रुपये बताया गया।
दूसरे क्लीनिक का दिया गया पता
मादी क्षेत्र स्थित रीता क्लीनिक में एनआईसीयू वार्ड संचालित होता मिला। यहां मौजूद सचिन नामक व्यक्ति ने स्वयं यह काम करने से मना किया, लेकिन आनंद पैथोलॉजी जाने की सलाह दी और कहा कि वहां यह काम हो जाएगा।
सीएचसी के पास संचालित क्लीनिक भी जांच के दायरे में
कोपागंज सीएचसी से करीब 50 मीटर दूर एक हार्डवेयर दुकान में संचालित क्लीनिक में भी टीम पहुंची। वहां मौजूद एक युवती ने शुरुआत में काम हो जाने की बात कही और अपनी मां सविता से बात कराने का आश्वासन दिया। हालांकि बाद में फोन आने पर उसने कहा कि उसकी मां की तबीयत खराब है और वहां इस तरह का कोई काम नहीं किया जाता।
स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के दिए संकेत
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. पंकज ने कहा कि अवैध क्लीनिकों और गर्भपात से जुड़ी शिकायतें गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें जल्द ही छापेमारी कर जांच और कार्रवाई करेंगी। साथ ही सरकारी अस्पतालों के आसपास संचालित ऐसे संस्थानों की भी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।