लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: 15 लोगों की मौत, सीएम योगी का बड़ा एक्शन
राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बिजली विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं:
- रामकृष्ण उपाध्याय
- वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला
- तूशॉक कृष्णा जायसवाल
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
चार अधिकारी सस्पेंड
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं:
- गौरव कुमार, एक्सईएन, जानकीपुरम (बिजली विभाग)
- कमलेंद्र कुमार सिंह, अग्निशमन अधिकारी, इंदिरा नगर
- अनिल कुमार, एई, लखनऊ विकास प्राधिकरण
- प्रमोद पांडे, जेई, लखनऊ विकास प्राधिकरण
SIT करेगी जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। SIT में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत प्रमुख और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
हादसे के बाद उठ रहे कई सवाल
इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इमारत में कोचिंग सेंटर चल रहा था, क्या उसके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि अनुमति ली गई थी तो संबंधित विभागों ने भवन की सुरक्षा और मानकों की जांच क्यों नहीं की। वहीं यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधि चलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इसके अलावा इमारत में इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था क्यों नहीं थी, क्या भवन को लेकर कभी कोई नोटिस जारी की गई थी, और यदि नोटिस दी गई थी तो नियमों का पालन न होने पर इमारत को सील क्यों नहीं किया गया। लोगों का सवाल है कि क्या हर बार किसी बड़े हादसे के बाद ही जांच और कार्रवाई होगी। साथ ही 15 लोगों की मौत के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
फायर विभाग ने क्या कहा
उत्तर प्रदेश फायर विभाग का कहना है कि इस इमारत को फायर एनओसी की आवश्यकता नहीं थी। विभाग के नियमों के अनुसार 15 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य होती है। आमतौर पर यह ऊंचाई पांच मंजिला भवन के बराबर होती है।
जिस इमारत में आग लगी वह केवल तीन मंजिला थी, इसलिए वह फायर विभाग के एनओसी नियमों के दायरे में नहीं आती थी। हालांकि अब यह सवाल उठ रहा है कि भवन के व्यावसायिक उपयोग के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आवश्यक अनुमति दी थी या नहीं। इस संबंध में एलडीए को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
सीएम योगी ने रद्द किए सभी कार्यक्रम
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अगले दिन के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए। उन्हें आगरा और हाथरस के दौरे पर जाना था, लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने घायलों से हादसे की जानकारी ली और पूछा कि वे किस तरह बाहर निकले, आग कैसे लगी और उनके साथ कितने लोग मौजूद थे।
उच्च स्तरीय बैठक में जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
घटनास्थल और अस्पताल का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।