शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों

शिक्षकों को राहत, बाल देखभाल अवकाश के लिए उपायुक्त की मंजूरी की शर्त हटाई गई

शिक्षकों को सीसीएल नियमों में बड़ी राहत

शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) के लिए जिला उपायुक्त की अनुशंसा अनिवार्य करने वाला आदेश वापस ले लिया। शिक्षक संगठनों के विरोध के बाद विभाग ने 9 मार्च को जारी किए गए उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें सीसीएल के आवेदन को जिला उपायुक्त की सिफारिश के बाद ही आगे भेजने का प्रावधान किया गया था।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक जितेंद्र कुमार ने इस संबंध में सोमवार को एक पत्र जारी किया। पत्र के माध्यम से सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को नए निर्णय की जानकारी दी गई तथा निर्देशों का पालन करने को कहा गया।

इस फैसले के बाद शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को सीसीएल के लिए आवेदन स्वीकृत कराने में होने वाली अनावश्यक देरी से राहत मिलने की उम्मीद जताई गई। अब इन मामलों में जिला उपायुक्त की अनुशंसा की आवश्यकता नहीं रहेगी।

हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 15 जून को शिक्षा महानिदेशक के साथ हुई बैठक में उन्होंने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

उन्होंने कहा कि सीसीएल फाइलों को उपायुक्त के माध्यम से भेजने की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) से प्रिंसिपल पदोन्नति (आरओएच) से जुड़े लंबित मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा महानिदेशक ने मेवात क्षेत्र के पीजीटी से प्रिंसिपल पदोन्नति से संबंधित फाइलों पर भी तेजी दिखाई थी।

इसके अलावा वर्ष 2016 से अब तक की वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए गठित समिति को भी निदेशक स्तर से मंजूरी प्रदान कर दी गई। समिति को तत्काल प्रभाव से काम शुरू करने के निर्देश दिए गए ताकि लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जा सके।

वहीं, यात्रा रियायत भत्ता (टीए) और महंगाई भत्ता (डीए) को वेतन की तरह नियमित रूप से जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त विभाग के पास भेजा गया था।