CBSE की तीन-भाषा नीति पर फिलहाल रोक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को CBSE की नई तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की जानी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले को पहले से लंबित समान याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही विस्तृत सुनवाई हो चुकी है, इसलिए फिलहाल किसी प्रकार का अंतरिम आदेश या रोक नहीं लगाई जा सकती।
एनजीओ ने उठाए क्रियान्वयन पर सवाल
यह याचिका 'फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी' नामक गैर-सरकारी संगठन की ओर से दाखिल की गई है।
संगठन की तरफ से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वे तीन-भाषा नीति का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके लागू किए जाने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने संगठन के नाम को लेकर हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या ऐसा नाम लोगों या अदालत में डर पैदा करने के लिए रखा गया है। इस पर वकील ने बताया कि यह वर्ष 2013 में स्थापित एक पुराना ट्रस्ट है।
14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
इससे पहले 27 मई को अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी और केंद्र सरकार, CBSE तथा NCERT को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह भी पूछा था कि नई नीति को लागू करने के लिए CBSE की तैयारियां किस स्तर पर हैं और इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
क्या है नई तीन-भाषा नीति?
CBSE के हालिया सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा।
इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी होंगी। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के तहत लागू की जा रही है।
बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों की भाषा क्षमता और सांस्कृतिक समझ को मजबूत बनाना है।
विदेशी भाषा पढ़ने वाले छात्रों के लिए नियम
CBSE के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे पहले दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इसके बाद विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा।
विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी लिया जा सकता है।
कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में नहीं होगा तीसरी भाषा का पेपर
छात्रों पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए CBSE ने फैसला लिया है कि तीसरी भाषा (R3) की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
इस विषय का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा और उसके अंक CBSE के प्रमाणपत्र में दर्ज किए जाएंगे।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को केवल R3 विषय के कारण कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
शिक्षक उपलब्ध नहीं होने पर क्या होगा?
जहां संबंधित भाषा के योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, वहां स्कूल अस्थायी व्यवस्था के तहत अन्य विषयों के ऐसे शिक्षकों की मदद ले सकेंगे जिन्हें उस भाषा की कार्यात्मक जानकारी हो।
इसके अलावा स्कूलों को इंटर-स्कूल संसाधन साझा करने, वर्चुअल या हाइब्रिड क्लास चलाने, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों की सेवाएं लेने और योग्य स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को नियुक्त करने की अनुमति भी दी गई है।
दिव्यांग और विदेशी छात्रों को मिलेगी छूट
CBSE ने कहा है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक छूट दी जाएगी।
वहीं विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को परिस्थितियों के आधार पर दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से छूट मिल सकती है।
गणित और विज्ञान में भी होगा बदलाव
CBSE ने अप्रैल 2026 में घोषणा की थी कि 2026-27 सत्र से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान विषयों के लिए दो-स्तरीय प्रणाली लागू की जाएगी।
इसके तहत दोनों विषयों में एक अनिवार्य स्टैंडर्ड स्तर और एक वैकल्पिक एडवांस्ड स्तर होगा।
सभी छात्रों को 80 अंकों की समान परीक्षा देनी होगी। वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र अतिरिक्त एडवांस्ड पेपर देकर अपनी विषयगत समझ और उच्च स्तरीय सोच क्षमता का प्रदर्शन कर सकेंगे।