गौतमबुद्ध नगर के एसजीएसटी विभाग में अनियमितता और आ

नोएडा के 9 जीएसटी अधिकारियों पर लटकी तलवार, पान मसाला से लदी गाड़ी पर जुर्माना लगाने में गड़बड़ी का मामला

राज्य कर विभाग

गौतमबुद्ध नगर। राज्य कर (एसजीएसटी) विभाग गौतमबुद्ध नगर इन दिनों आंतरिक कलह और विवादों से जूझ रहा है। विभागीय कार्यशैली पर सवाल तब खड़े हो गए जब पान मसाला और तंबाकू उत्पादों से लदी एक गाड़ी पर लगाए गए जुर्माने में गड़बड़ी सामने आई। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद नौ अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी गई है।

 

गाजियाबाद जोन में पकड़ी गई थी गाड़ी

सूत्रों के अनुसार 11 अगस्त को गाजियाबाद जोन में जांच दल ने एक वाहन को पकड़ा था। वाहन में पान मसाला और तंबाकू उत्पाद बड़ी मात्रा में लदे हुए थे। नियमानुसार गाड़ी और माल जब्त कर टैक्स व जुर्माना लगाया गया, लेकिन जांच में पाया गया कि लगाए गए जुर्माने और कर आकलन में गंभीर अनियमितता की गई। आरोप है कि जुर्माना और टैक्स की राशि वास्तविक से कहीं कम आंकी गई थी।

 

गोपनीय जांच में आरोप साबित

इस पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई और यह पुष्टि हुई कि कार्रवाई नियमों के अनुरूप नहीं की गई थी। रिपोर्ट के आधार पर शासन को नौ अधिकारियों के निलंबन की संस्तुति भेजी गई है।

 

विभाग में बढ़ी खींचतान

जांच रिपोर्ट के बाद विभाग में आंतरिक विवाद और तेज हो गया है। जिन नौ अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, उनमें से अधिकांश ने पूर्व में अपर आयुक्त नोएडा जोन पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। ऐसे में कार्रवाई को लेकर विभाग के भीतर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई मान रहे हैं तो कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह प्रतिशोध की कार्रवाई है।

 

वरिष्ठ अधिकारी ने बनाई दूरी

इस मामले पर अपर आयुक्त राज्य कर (एसजीएसटी) गौतमबुद्ध नगर संदीप भागिया ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “यह गोपनीय जांच है। इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती।”

 

सवालों के घेरे में विभाग की कार्यशैली

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पान मसाला और तंबाकू कारोबार से जुड़ी गाड़ियों पर अलग-अलग मामलों में एक जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग कार्रवाई किए जाने की चर्चा है। इससे न केवल विभाग की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है, बल्कि अधिकारियों के बीच मतभेद भी सतह पर आ गए हैं।